पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया की प्रमुख निवेश और वित्तीय संस्था Goldman Sachs ने एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है, तो ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत इस वर्ष की अंतिम तिमाही में 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है।
हालांकि, Goldman Sachs ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह उसका मुख्य अनुमान नहीं, बल्कि एक संभावित जोखिम वाला परिदृश्य है। यानी यह स्थिति तभी बन सकती है जब क्षेत्र में तनाव और बढ़े तथा तेल आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहे।
दरअसल, पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। इसके साथ ही लाल सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों ने भी वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यदि इन क्षेत्रों से तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर निर्यात होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर तेजी से देखने को मिलता है।
Goldman Sachs की रिपोर्ट के अनुसार, यदि हालात सामान्य रहते हैं और क्षेत्रीय तनाव धीरे-धीरे कम होता है, तो इस वर्ष की अंतिम तिमाही में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। वहीं अगले वर्ष यह औसत करीब 75 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है।
लेकिन रिपोर्ट यह भी कहती है कि फिलहाल कीमतों में तेजी का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक तेल भंडार में हाल के महीनों में कमी आई है। ऐसे में यदि आपूर्ति में कोई बड़ा व्यवधान आता है, तो बाजार पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील प्रतिक्रिया दे सकता है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि चीन में कच्चे तेल की मांग में कुछ नरमी आने से कीमतों पर दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है। हालांकि, यदि पश्चिम एशिया में स्थिति और बिगड़ती है, तो आपूर्ति संबंधी चिंताएं मांग से अधिक प्रभाव डाल सकती हैं।
Goldman Sachs ने निवेशकों के लिए यूरोप के डीजल बाजार को लेकर भी सावधानी और अवसर दोनों की बात कही है। रिपोर्ट के अनुसार, डीजल की आपूर्ति पहले से दबाव में है और यदि वैश्विक परिस्थितियां बिगड़ती हैं, तो डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। ऊर्जा की बढ़ती लागत का प्रभाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही है। हालांकि, तेल बाजार में कीमतें वैश्विक घटनाओं के अनुसार लगातार बदलती रहती हैं।
अब पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति, होरमुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि तेल बाजार स्थिर रहता है या कीमतों में एक बार फिर बड़ी तेजी देखने को मिलती है।


