भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी है, लेकिन हाल ही में एक ऐसा बयान सामने आया जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी का ध्यान खींचा। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वरिष्ठ अधिकारी रियर एडमिरल यू जियान ने भारतीय सेना और नौसेना की खुले मंच से सराहना करते हुए कहा कि चीन भारतीय जवानों की मदद को कभी नहीं भूलेगा।
यह बयान उस घटना से जुड़ा है, जब पिछले वर्ष केरल तट के पास एक मालवाहक जहाज में भीषण आग लग गई थी। जहाज पर मौजूद 12 चीनी चालक दल के सदस्य गंभीर खतरे में फंस गए थे। उस समय भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर सभी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
नई दिल्ली में PLA की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में रियर एडमिरल यू जियान ने कहा कि भारत और चीन के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन दोनों देशों के साझा हित उनसे कहीं अधिक बड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य स्तर पर संवाद जारी रहना चाहिए तथा आपसी विश्वास को मजबूत करने की आवश्यकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद दोनों पक्ष लगातार बातचीत के माध्यम से तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
इसी बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित आसियान (ASEAN) से जुड़ी मंत्रीस्तरीय बैठकों के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत और चीन के बीच सामान्य संबंधों की बहाली के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने भारतीय कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच, बढ़ते व्यापार घाटे और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर आगे बढ़ने चाहिए।
जयशंकर ने यह भी दोहराया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के रिश्तों की बुनियाद है। उनके अनुसार, सीमा पर सामान्य स्थिति कायम रहने से ही द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती मिल सकती है और एशिया में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
भारत और चीन के बीच हाल के इन घटनाक्रमों को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर भारतीय सेना द्वारा मानवीय आधार पर की गई मदद के लिए चीन ने सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया है, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के शीर्ष राजनयिक सीमा विवाद, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद बनाए हुए हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच विश्वास पूरी तरह बहाल होने में अभी समय लग सकता है। सीमा से जुड़े मुद्दे, आर्थिक चुनौतियां और क्षेत्रीय रणनीतिक प्रतिस्पर्धा अब भी दोनों देशों के संबंधों में प्रमुख विषय बने हुए हैं। इसके बावजूद संवाद और सहयोग के प्रयास भविष्य में द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा दे सकते हैं।


