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Health Tips: बिना शराब भी बढ़ सकता है Fatty Liver का खतरा, जानिए Non-Alcoholic Fatty Liver Disease के लक्षण और बचाव

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह ऐसी स्थिति है जिसमें शराब का सेवन न करने वाले लोगों के लिवर में भी अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह लिवर में सूजन, लिवर सिरोसिस और गंभीर मामलों में लिवर फेलियर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज में लिवर की कोशिकाओं में सामान्य से अधिक फैट जमा हो जाता है। धीरे-धीरे यह स्थिति लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। शुरुआत में इस बीमारी के लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे कई बार “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है। हालांकि यह शब्द आम बोलचाल में इस्तेमाल होता है, लेकिन बीमारी की गंभीरता व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा तला-भुना भोजन, जंक फूड, मीठे पेय पदार्थ, मोटापा, खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी, शारीरिक गतिविधि की कमी, इंसुलिन रेजिस्टेंस, टाइप-2 डायबिटीज, उच्च कोलेस्ट्रॉल, तनाव और पर्याप्त नींद न लेना इस समस्या के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। कुछ मामलों में हार्मोनल असंतुलन या थायरॉइड संबंधी समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।

फैटी लिवर के शुरुआती लक्षणों में लगातार थकान महसूस होना, भूख कम लगना, पाचन संबंधी दिक्कतें, पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में भारीपन या दर्द, अचानक वजन बढ़ना या घटना और गंभीर मामलों में आंखों या त्वचा का पीला पड़ना शामिल हो सकता है। हालांकि, कई लोगों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।

इस बीमारी से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। नियमित रूप से 30 से 45 मिनट तक वॉक, योग, साइकिलिंग या अन्य हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करना लाभदायक हो सकता है। साथ ही संतुलित आहार में हरी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज, फाइबर और प्रोटीन को शामिल करना चाहिए।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मीठे पेय पदार्थ, अधिक तली-भुनी चीजें, प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक रेड मीट के सेवन को सीमित रखा जाए। यदि वजन अधिक है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार धीरे-धीरे वजन कम करना बेहतर माना जाता है, क्योंकि बहुत तेजी से वजन घटाना भी कुछ मामलों में नुकसानदायक हो सकता है।

ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की नियमित जांच कराते रहना भी जरूरी है, खासकर यदि आपको डायबिटीज, मोटापा या मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी समस्याएं हैं। तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन, योग और गहरी सांस लेने जैसी तकनीकें भी मददगार हो सकती हैं।

यदि आपको लंबे समय तक थकान, पेट में असहजता या ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हों, तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। समय पर जांच और उचित उपचार से फैटी लिवर की गंभीर जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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