भारतीय मुद्रा बाजार में बुधवार को कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये पर दबाव बना रहा। इसके साथ ही घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली और वैश्विक निवेशकों की सतर्कता का असर भी भारतीय मुद्रा पर साफ दिखाई दिया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 34 पैसे कमजोर होकर 96.59 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार की शुरुआत 96.36 के स्तर से हुई थी और पूरे दिन रुपये में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 96.25 के स्तर पर बंद हुआ था।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डालती है। तेल आयात महंगा होने से विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ती है, जिसका असर रुपये की विनिमय दर पर पड़ सकता है।
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में चार प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की कीमतें लगभग 94.92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गईं। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता को इस तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
घरेलू शेयर बाजार में भी निवेशकों का रुख कमजोर रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 715.06 अंक की गिरावट के साथ 76,755.05 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 191.45 अंक टूटकर 23,996.25 के स्तर पर आ गया। बाजार में बिकवाली का दबाव अधिकांश सेक्टर्स में देखने को मिला।
हालांकि, बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत यह रहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में 1,650.16 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। इससे यह संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों की भारत में रुचि पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है या तेल की कीमतों में और तेजी आती है, तो भारतीय मुद्रा और शेयर बाजार दोनों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बनी हुई है, क्योंकि यही कारक आने वाले दिनों में भारतीय वित्तीय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


