अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। हाल के घटनाक्रमों ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। दोनों देशों की ओर से लगातार सख्त बयान सामने आ रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय हालात और अधिक संवेदनशील बन गए हैं।
जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से किए गए कई हमलों को सफलतापूर्वक रोक दिया। वहीं, ईरानी अधिकारियों के अनुसार मंगलवार देर रात अमेरिकी सेना ने पश्चिमी और दक्षिणी ईरान के कुछ क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई की। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी जहाज पर ईरान की ओर से मिसाइल, ड्रोन, रॉकेट या किसी अन्य हथियार से हमला किया जाता है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, जैसे पुल और बिजली संयंत्रों, को निशाना बनाएगा। ट्रंप का यह बयान सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव न केवल तेल बाजार बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह कथित रूप से “पिकैक्स माउंटेन” जैसे रणनीतिक क्षेत्र को आधार बनाकर आगे की सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। वहीं अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दोनों देशों के आरोप-प्रत्यारोप ने तनाव को और बढ़ा दिया है।
पेंटागन के अनुसार, इस पूरे संघर्ष में अब तक लगभग 37.5 अरब डॉलर का खर्च हो चुका है। लगातार बढ़ते सैन्य खर्च को लेकर रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है।
इसी बीच एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु कार्यक्रम से जुड़े एक समझौते को मंजूरी दी है। इस समझौते के तहत सऊदी अरब अपने नागरिक परमाणु रिएक्टरों के लिए ईंधन तैयार कर सकेगा। हालांकि, इज़राइल के कुछ विपक्षी नेताओं ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत आगे नहीं बढ़ती, तो पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव और बढ़ सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर बनी हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन भी दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। ट्रंप की चेतावनी, ईरान के आरोप, जॉर्डन के दावे और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां आने वाले दिनों में हालात को और गंभीर बना सकती हैं। हालांकि, सैन्य कार्रवाइयों और दावों से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक और स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि का इंतजार करना आवश्यक है।


