अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार हमले किए जाने के बावजूद ईरान की मिसाइल क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ)’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तेहरान के पास अब भी बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हाल के घटनाक्रम बताते हैं कि ईरान ने अपने हथियार कार्यक्रम के कुछ हिस्सों को दोबारा सक्रिय कर लिया है और वह अब भी अमेरिकी सेना तथा उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए चुनौती बना हुआ है।
रिपोर्ट में मिलिट्री एनालिस्ट्स के हवाले से कहा गया है कि जॉर्डन स्थित मुवाफ्फ़क साल्टी एयर बेस पर हुए हालिया हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी। माना जा रहा है कि इस हमले में ईरान ने अपने उन्नत ‘खेबर शेकन’ मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया। यही मिसाइल सिस्टम उन भूमिगत ठिकानों में रखा गया था जिन्हें इस साल की शुरुआत में अमेरिका और इज़राइल ने हवाई हमलों में निशाना बनाया था।
WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च और अप्रैल में भूमिगत मिसाइल ठिकानों पर लगातार बमबारी के बावजूद ईरान ने कई सुरंगों को फिर से खोल दिया, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कर ली और कुछ स्थानों से मिसाइल संचालन दोबारा शुरू कर दिया। रिपोर्ट का कहना है कि यह घटनाक्रम दिखाता है कि सैन्य दबाव के बावजूद ईरान अपनी रणनीतिक क्षमताओं को दोबारा बहाल करने में जुटा हुआ है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इसके बावजूद जॉर्डन में हुआ हमला केवल पांच दिनों के भीतर अमेरिकी सेना पर चौथा बड़ा हमला बताया गया है। इससे संकेत मिलता है कि ईरान का मिसाइल भंडार पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और संभव है कि उसने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देने की अपनी क्षमता में भी सुधार किया हो।
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज़ में ईरान प्रोग्राम के वरिष्ठ निदेशक बेहनम बेन तालेब्लू ने WSJ से कहा कि अरब क्षेत्र में ईरान की रणनीति का उद्देश्य अमेरिका पर दबाव बनाना है ताकि वह इस इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करने पर मजबूर हो जाए। उनके अनुसार, ईरान की मौजूदा नीति क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की दिशा में काम कर रही है।
रिपोर्ट में अमेरिका के पहले के आकलनों और मौजूदा युद्ध स्थिति के बीच अंतर को भी रेखांकित किया गया है। अप्रैल में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा था कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम लगभग पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है और उसके अधिकांश लॉन्चर तथा मिसाइलें नष्ट कर दी गई हैं। हालांकि, बाद में सीनेट एप्रोप्रिएशन्स कमेटी की सुनवाई के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिका को कभी यह उम्मीद नहीं थी कि ईरान अपनी पूरी हमला करने की क्षमता खो देगा।
पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना था, लेकिन यह मान लेना सही नहीं होगा कि ईरान पूरी तरह जवाबी कार्रवाई करने में असमर्थ हो गया है। उनके अनुसार असली सवाल यह है कि अमेरिका जैसे शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ ईरान किस स्तर तक हमला करने की क्षमता रखता है।
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच यह रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि ईरान की सैन्य क्षमता अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। ऐसे में अमेरिका, इज़राइल और उनके सहयोगी देशों के सामने सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। हालांकि, रिपोर्ट में किए गए दावों और सैन्य घटनाक्रमों को लेकर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दावे हैं, इसलिए अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक और स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि महत्वपूर्ण मानी जाती है।


