पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने सरकार से सीधे बातचीत की अपील की है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जंतर-मंतर या किसी न्यूट्रल स्थान पर बैठक के लिए तैयार है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संदेश या संपर्क नहीं किया गया है।
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में सौरव दास ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि बातचीत कहीं भी हो सकती है। इसी के आधार पर पार्टी ने अपना प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहे तो जंतर-मंतर या कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया जैसे किसी तटस्थ स्थान पर बैठक की जा सकती है।
सौरव दास ने कहा कि बातचीत की तारीख, समय और स्थान तय करने के लिए सरकार को सीधे पार्टी नेतृत्व से संपर्क करना चाहिए। उनका कहना था कि अब तक उन्हें सरकार की ओर से किसी भी प्रकार का आधिकारिक संदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
पेपर लीक मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरव दास ने कहा कि केवल घोषणाओं से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता को आश्वासन देने के बजाय जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है।
दास ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कायम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर पार्टी धर्मेंद्र प्रधान से नीचे के स्तर के किसी प्रतिनिधि के साथ बातचीत नहीं करेगी।
इस बीच, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब देशभर में छात्र आंदोलन कर रहे हैं, तब प्रधानमंत्री का संसद में मौजूद न होना कई सवाल खड़े करता है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पेपर लीक में शामिल लोगों को जल्द और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, विपक्षी दलों ने इस घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल सोशल मीडिया पर बयान देने के बजाय सरकार को ठोस कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
फिलहाल पेपर लीक मामले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है। वहीं, प्रदर्शनकारी संगठनों की ओर से आंदोलन और सरकार से सीधे संवाद की मांग भी लगातार उठाई जा रही है।


