अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अमेरिका ने भारत सहित 17 देशों से आने वाले कुछ उत्पादों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की जांच के बाद लिया गया है, जिसमें दावा किया गया कि कई देशों ने कथित तौर पर जबरन मजदूरी (Forced Labor) से बने उत्पादों को अपनी सप्लाई चेन से रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।
USTR के अनुसार, सेक्शन 301 के तहत की गई समीक्षा के बाद भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका, कनाडा, मेक्सिको, ब्रिटेन समेत कुल 17 देशों पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाने का निर्णय लिया गया है। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी से बने उत्पादों की एंट्री रोकना है।
इस फैसले का मतलब यह है कि जिन भारतीय उत्पादों पर पहले से अमेरिकी आयात शुल्क लागू है, उन पर अब 10% अतिरिक्त टैरिफ भी लगेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी उत्पाद पर पहले 15% आयात शुल्क था, तो अब उस पर कुल 25% शुल्क लग सकता है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो सकता है और उसकी मांग पर असर पड़ने की आशंका है।
हालांकि भारत के लिए राहत की बात यह रही कि शुरुआती चर्चाओं में 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन भारत और अमेरिका के बीच श्रम मानकों और सप्लाई चेन को लेकर हुई बातचीत के बाद भारत के लिए अतिरिक्त टैरिफ 10% तक सीमित रखा गया। इसे भारत के लिए अपेक्षाकृत सकारात्मक माना जा रहा है।
अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अतिरिक्त टैरिफ सभी उत्पादों पर लागू नहीं होगा। स्टील, एल्युमिनियम जैसे उत्पाद, जिन पर पहले से अलग सेक्टोरल टैरिफ लागू हैं, इस नए फैसले से प्रभावित नहीं होंगे। इसके अलावा कुछ ऊर्जा उत्पाद, उर्वरक और USMCA समझौते के तहत होने वाला व्यापार भी इस अतिरिक्त शुल्क के दायरे से बाहर रहेगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत सरकार को इस तरह के कदम की पहले से आशंका थी। इसी वजह से सरकार ने कथित फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों की पहचान करने और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का बेहतर पालन सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देशों पर काम शुरू कर दिया था। इसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को भविष्य में ऐसे व्यापारिक प्रतिबंधों से बचाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल भारत को निशाना बनाकर नहीं लिया गया है, बल्कि कई देशों पर समान रूप से लागू किया गया है। हालांकि इसका असर भारतीय निर्यात के कुछ क्षेत्रों पर पड़ सकता है, लेकिन सरकार की तैयारियों और अमेरिका के साथ जारी वार्ता से भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।


