भारत और इज़राइल के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर अहम प्रगति हुई है। दोनों देशों ने नई दिल्ली में दूसरे दौर की वार्ता सफलतापूर्वक पूरी कर ली है और जल्द से जल्द एक संतुलित, व्यापक और दोनों देशों के लिए लाभकारी समझौते को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इस बातचीत का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति देना है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह चार दिवसीय वार्ता 20 से 23 जुलाई तक नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयोजित की गई। इस दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने प्रस्तावित FTA के सभी प्रमुख पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे की प्रगति दर्ज की।
बातचीत के दौरान दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञों ने वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, रूल्स ऑफ ओरिजिन (Rules of Origin), सैनिटरी और फाइटो-सैनिटरी उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), कस्टम प्रक्रियाएं, व्यापार सुगमता और आर्थिक सहयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। मंत्रालय ने कहा कि वार्ता रचनात्मक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई, जिसमें मतभेद कम करने और सहमति वाले क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
भारत की ओर से वार्ता का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय भादू ने किया। उन्होंने कहा कि भारत दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित और व्यापक समझौते के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे व्यापार और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।
इज़राइल की मुख्य वार्ताकार यिफात एलोन पेरेल, जो इज़राइल के अर्थव्यवस्था और उद्योग मंत्रालय के विदेशी व्यापार प्रशासन में वरिष्ठ अधिकारी हैं, ने पहले दौर के बाद हुई प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को वार्ता की गति बनाए रखते हुए जल्द एक महत्वाकांक्षी और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते तक पहुंचना चाहिए।
वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि यह वार्ता नवंबर 2025 में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित टर्म्स ऑफ रेफरेंस (Terms of Reference) के आधार पर आगे बढ़ रही है। यही दस्तावेज FTA से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में बातचीत का ढांचा तय करता है और व्यापार, निवेश तथा आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।
यदि भारत और इज़राइल के बीच यह मुक्त व्यापार समझौता अंतिम रूप लेता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और उद्योगों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों के लिए इज़राइली बाजार में नए अवसर भी खुल सकते हैं।


