भारतीय निशानेबाजी टीम ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया है। चीन के हांगझोउ में आयोजित आईएसएसएफ (ISSF) विश्व कप 2026 में भारत की सोनम उत्तम मस्कर और हिमांशु ढिल्लों की जोड़ी ने 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर तिरंगा बुलंद किया। इस उपलब्धि के साथ भारत ने प्रतियोगिता में अपना चौथा पदक भी हासिल कर लिया है।
सोनम उत्तम मस्कर और हिमांशु ढिल्लों ने पूरे मुकाबले के दौरान बेहतरीन तालमेल, सटीक निशाने और शानदार मानसिक संतुलन का प्रदर्शन किया। दोनों खिलाड़ियों ने 220.6-220.6 अंक अर्जित करते हुए कुल 441.2 अंक हासिल किए। इस प्रदर्शन के दम पर भारतीय जोड़ी ने कांस्य पदक अपने नाम किया और विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया।
इस स्पर्धा में मेजबान चीन का दबदबा देखने को मिला। चीन की पहली टीम ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि दूसरी चीनी टीम ने रजत पदक जीता। कड़े मुकाबले के बावजूद भारतीय जोड़ी ने तीसरा स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि भारतीय निशानेबाजी अब दुनिया की मजबूत टीमों में शामिल हो चुकी है।
आईएसएसएफ विश्व कप को निशानेबाजी की सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गिना जाता है। इस टूर्नामेंट में दुनिया के शीर्ष निशानेबाज हिस्सा लेते हैं और यहां का प्रदर्शन भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं, जैसे विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में भारत का लगातार पदक जीतना देश के लिए सकारात्मक संकेत है।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय निशानेबाजी ने लगातार नई ऊंचाइयों को छुआ है। युवा खिलाड़ियों की मेहनत, आधुनिक प्रशिक्षण तकनीकों और बेहतर कोचिंग का असर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में साफ दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि भारत अब लगभग हर बड़े शूटिंग टूर्नामेंट में पदक जीतने की मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है।
इस ताजा सफलता के साथ हांगझोउ में चल रहे आईएसएसएफ विश्व कप में भारत के कुल पदकों की संख्या चार हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारतीय दल अब तक एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक जीत चुका है। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि भारतीय निशानेबाज लगातार शानदार फॉर्म में हैं और विभिन्न स्पर्धाओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर पदक जीतना खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी प्रदान करता है। इससे आने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन की संभावना और मजबूत होती है। सोनम उत्तम मस्कर और हिमांशु ढिल्लों की यह उपलब्धि युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
भारतीय टीम से अभी प्रतियोगिता के बाकी मुकाबलों में भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ी इसी लय को बनाए रखते हैं तो भारत के पदकों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल सोनम और हिमांशु की इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय निशानेबाजी विश्व स्तर पर तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रही है।


