डिप्रेशन (अवसाद) आज दुनिया की सबसे आम मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इसे केवल उदासी या रोने तक सीमित समझना सही नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डिप्रेशन एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक उदास रहता है, रोजमर्रा के कामों में रुचि खो देता है और उसका मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं और पुरुषों में डिप्रेशन के लक्षण एक जैसे नहीं दिखते। कई बार महिलाओं में उदासी साफ दिखाई देती है, जबकि पुरुषों में यही समस्या गुस्से, चिड़चिड़ेपन या व्यवहार में बदलाव के रूप में सामने आ सकती है।
महिलाओं में डिप्रेशन ज्यादा क्यों देखा जाता है?
WHO के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं में डिप्रेशन की संभावना पुरुषों की तुलना में अधिक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे हार्मोनल बदलाव भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं।
महिलाओं में डिप्रेशन का जोखिम इन परिस्थितियों में बढ़ सकता है—
मासिक धर्म (पीरियड्स) से पहले हार्मोनल बदलाव
गर्भावस्था
प्रसव के बाद (पोस्टपार्टम डिप्रेशन)
मेनोपॉज
इसके अलावा महिलाएं अक्सर अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करती हैं, इसलिए उनके लक्षण जल्दी पहचान में आ जाते हैं।
महिलाओं में डिप्रेशन के प्रमुख लक्षण
यदि लंबे समय तक ये लक्षण बने रहें, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है—
बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार रोने का मन होना
लगातार उदासी या खालीपन महसूस होना
हर समय चिंता या घबराहट रहना
खुद को दोषी मानना या अपराधबोध महसूस करना
हमेशा थकान महसूस होना
लोगों से मिलने-जुलने का मन न करना
पहले पसंद आने वाले कामों में रुचि खत्म हो जाना
पुरुषों में डिप्रेशन कैसे दिखाई देता है?
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों में डिप्रेशन कई बार अलग तरीके से सामने आता है। वे अपनी उदासी व्यक्त करने के बजाय व्यवहार में बदलाव दिखा सकते हैं।
कई पुरुष सामाजिक दबाव के कारण अपनी भावनाएं साझा नहीं करते, जिससे समस्या लंबे समय तक छिपी रह सकती है।
पुरुषों में डिप्रेशन के प्रमुख लक्षण
हर समय चिड़चिड़ापन रहना
छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना
आक्रामक या हिंसक व्यवहार
जरूरत से ज्यादा काम में खुद को व्यस्त रखना
शराब, धूम्रपान या अन्य नशे का सहारा लेना
परिवार और दोस्तों से दूरी बना लेना
अपनी भावनाओं को किसी से साझा न करना
पुरुष और महिलाओं में लक्षण अलग क्यों दिखते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि जैविक, हार्मोनल, सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों की वजह से दोनों में डिप्रेशन के लक्षण अलग-अलग तरीके से सामने आ सकते हैं।
कई पुरुष बचपन से ही अपनी भावनाओं को छिपाने और “मजबूत” बने रहने का दबाव महसूस करते हैं। ऐसे में वे उदासी के बजाय गुस्से या चिड़चिड़ेपन के रूप में अपनी परेशानी व्यक्त कर सकते हैं।
दूसरी ओर, महिलाएं अपनी भावनाएं साझा करने और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेने में अपेक्षाकृत अधिक सहज होती हैं।
कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
यदि उदासी, गुस्सा, निराशा, रुचि में कमी, नींद की समस्या या व्यवहार में बदलाव दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार बना रहे और दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे, तो मनोचिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
समय पर उपचार, काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर दवाओं की मदद से डिप्रेशन का प्रभावी इलाज संभव है।
मानसिक स्वास्थ्य का रखें ध्यान
पर्याप्त नींद लें।
नियमित व्यायाम करें।
संतुलित आहार लें।
परिवार और दोस्तों से बातचीत करें।
तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान का अभ्यास करें।
जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेने में संकोच न करें।
निष्कर्ष
डिप्रेशन एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य मानसिक स्वास्थ्य समस्या है। पुरुषों और महिलाओं में इसके लक्षण अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं, इसलिए केवल उदासी को ही इसका संकेत मानना सही नहीं है। समय रहते लक्षणों को पहचानना और विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

