सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी बिक्री यानी ऑफर फॉर सेल (OFS) को संस्थागत निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। सरकार द्वारा 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए लाए गए इस ओएफएस में पहले ही दिन करीब 36,400 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं। इसे किसी भी OFS के लिए अब तक की सबसे बड़ी संस्थागत प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
एलआईसी के आईपीओ के लगभग चार साल बाद केंद्र सरकार कंपनी में अपनी अतिरिक्त हिस्सेदारी बेच रही है। इस OFS के जरिए सरकार कुल 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी निवेशकों को उपलब्ध करा रही है। इसमें 2.5 प्रतिशत आधार (Base Offer) के साथ 4 प्रतिशत ग्रीनशू ऑप्शन भी शामिल है, जिसका उपयोग अधिक मांग मिलने पर किया जा सकता है।
मंगलवार को संस्थागत निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया खुली थी। इस दौरान निवेशकों ने 94.45 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए आवेदन किया। इन बोलियों का संकेतात्मक मूल्य लगभग 383.84 रुपये प्रति शेयर रहा, जिसके आधार पर कुल बोली का मूल्य करीब 36,400 करोड़ रुपये आंका गया।
मजबूत मांग को देखते हुए सरकार ने ग्रीनशू ऑप्शन का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इसके तहत करीब 50.60 करोड़ अतिरिक्त इक्विटी शेयर भी बेचे जाएंगे। इस तरह कुल बिक्री बढ़कर 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी तक पहुंच जाएगी।
एलआईसी ने बताया कि इस OFS का 10 प्रतिशत हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित रखा गया है। खुदरा निवेशक बुधवार को बोली लगा सकेंगे। इसके अलावा कट-ऑफ कीमत पर आवेदन करने वाले खुदरा निवेशकों और कर्मचारियों को प्रति शेयर 10 रुपये की छूट भी दी जाएगी।
सरकार ने इस OFS के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य तय किया है। यह कीमत पिछले कारोबारी दिन के बंद भाव 424.35 रुपये से लगभग 10 प्रतिशत कम है। यदि पूरी 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी इस मूल्य पर बिकती है, तो सरकार को लगभग 31,000 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं।
निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणीश चावला ने कहा कि संस्थागत निवेशकों ने मूल पेशकश की तुलना में 3.32 गुना अधिक बोली लगाई है। उनके अनुसार यह भारतीय पूंजी बाजारों में निवेशकों के मजबूत भरोसे और सरकारी कंपनियों में बढ़ती रुचि का संकेत है।
हालांकि, OFS की घोषणा के बीच एलआईसी के शेयरों में गिरावट भी देखने को मिली। मंगलवार को कंपनी का शेयर बीएसई पर 7.86 प्रतिशत गिरकर 391 रुपये पर बंद हुआ। इसके बावजूद कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 4.95 लाख करोड़ रुपये बना रहा।
यह हिस्सेदारी बिक्री एलआईसी को सेबी द्वारा तय न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) की शर्त पूरी करने में भी मदद करेगी। फिलहाल कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी 96.5 प्रतिशत है, जबकि सेबी ने एलआईसी को 16 मई 2027 तक कम से कम 10 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का समय दिया है।
गौरतलब है कि सरकार ने मई 2022 में एलआईसी का आईपीओ लाकर 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची थी, जिससे करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। वहीं, अप्रैल 2026 में कंपनी के निदेशक मंडल ने 1:1 बोनस शेयर जारी करने को भी मंजूरी दी थी।
एलआईसी का यह OFS सरकार के चालू वित्त वर्ष के विनिवेश कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इससे सरकार को राजस्व जुटाने के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।


