तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे बहुचर्चित तलाक मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। संगीता ने चेंगलपट्टू जिला अदालत में दायर अपनी तलाक की याचिका वापस ले ली है। इसके बाद अदालत ने मामले का औपचारिक रूप से निस्तारण कर दिया। इस फैसले के साथ कई महीनों से सुर्खियों में बना यह कानूनी विवाद फिलहाल समाप्त हो गया है।
संगीता ने इसी वर्ष फरवरी में स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत तलाक की अर्जी दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया था कि विजय का एक महिला अभिनेत्री के साथ विवाहेतर संबंध था, जिसकी जानकारी उन्हें वर्ष 2021 में हुई। उन्होंने दावा किया था कि विजय ने रिश्ता खत्म करने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में भी कथित तौर पर वह संबंध जारी रहा। याचिका में यह भी कहा गया था कि विजय ने धीरे-धीरे उन्हें अपनी सामाजिक और सार्वजनिक जिंदगी से दूर कर दिया और कथित तौर पर उस अभिनेत्री के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों तथा विदेश यात्राओं में शामिल होते रहे।
याचिका में संगीता ने यह भी आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाली तस्वीरों और चर्चाओं के कारण उन्हें तथा उनके दोनों बच्चों जेसन संजय और दिव्या साशा को मानसिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं बंद करने सहित कई गंभीर आरोप भी लगाए थे। संगीता का कहना था कि उनका वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुका है और उसे आगे जारी रखना संभव नहीं है।
तलाक की याचिका तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले दायर की गई थी। हालांकि चुनाव में विजय की जीत और मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों के बीच सुलह की संभावनाओं की चर्चा शुरू हुई। जून 2026 में चेंगलपट्टू परिवार न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए अगली तारीख 7 अगस्त तय की थी। इसी बीच संगीता ने अदालत में अपनी याचिका वापस लेने का निर्णय लिया, जिसके बाद अदालत ने मामले का निपटारा कर दिया।
इससे पहले संगीता ने अदालत में एक अलग अंतरिम याचिका भी दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने चेन्नई के नीलांकरई स्थित पारिवारिक घर में अंतिम फैसला आने तक रहने की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि विवाह के 26 वर्षों के दौरान उन्होंने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी निभाई तथा उनके पास समान स्तर का कोई दूसरा आवास उपलब्ध नहीं है। उन्होंने गुजारा-भत्ता और आवास संबंधी अधिकारों की भी मांग की थी।
संगीता ने यह भी कहा था कि अदालत का दरवाजा खटखटाने से पहले उन्होंने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन बातचीत सफल नहीं हो सकी। बाद में उन्होंने अदालत में दायर पूरी तलाक याचिका ही वापस लेने का फैसला कर लिया। अब अदालत द्वारा मामला बंद किए जाने के बाद यह कानूनी विवाद समाप्त हो गया है। हालांकि याचिका वापस लेने के कारणों को लेकर दोनों पक्षों की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री विजय इस समय राज्य की प्रशासनिक जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं, जबकि उनके निजी जीवन से जुड़ा यह मामला पिछले कई महीनों से चर्चा का विषय बना हुआ था। अब तलाक की याचिका वापस लिए जाने के बाद इस पूरे विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है।


