पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षा बलों ने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग अभियानों में 10 आतंकवादियों को मार गिराया। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर (ISPR) के अनुसार यह अभियान दक्षिण वजीरिस्तान और अपर दीर जिलों में चलाया गया। सेना का कहना है कि सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के हमले की कोशिश को नाकाम करते हुए उन्हें जवाबी कार्रवाई में ढेर कर दिया। इस ऑपरेशन के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सुरक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि आतंकवाद के पूरी तरह सफाए तक अभियान लगातार जारी रहेगा।
आईएसपीआर के अनुसार पहला अभियान दक्षिण वजीरिस्तान के आजम वारसक इलाके में चलाया गया, जहां आतंकवादियों के एक समूह ने सुरक्षा चौकियों पर हमला करने की कोशिश की। सुरक्षा बल पहले से सतर्क थे और उन्होंने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए आठ आतंकवादियों को मार गिराया। सेना ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान आतंकवादियों का हमला पूरी तरह विफल कर दिया गया और सुरक्षा चौकियों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा।
दूसरा अभियान अपर दीर जिले में चलाया गया, जहां खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए दो और आतंकवादियों को ढेर कर दिया। अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और अन्य सैन्य सामग्री भी बरामद की गई। सेना का दावा है कि मारे गए सभी आतंकवादी क्षेत्र में कई आतंकी घटनाओं और सुरक्षा बलों पर हमलों में शामिल रहे थे।
पाकिस्तानी सरकार टीटीपी के आतंकवादियों के लिए आधिकारिक तौर पर “फितना अल खवारिज” शब्द का उपयोग करती है। सरकार का कहना है कि नवंबर 2022 में संघर्षविराम समाप्त होने के बाद टीटीपी ने खैबर पख्तूनख्वा और सीमावर्ती इलाकों में हमलों की संख्या बढ़ा दी है। इसके बाद से सेना लगातार आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए काम कर रहे सैनिकों का साहस प्रशंसनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक देश से आतंकवाद का पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता। उन्होंने सुरक्षा बलों को सफल अभियान के लिए बधाई देते हुए कहा कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ हर संभव कदम उठाती रहेगी।
खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से आतंकवादी गतिविधियों से प्रभावित रहा है। अफगानिस्तान से लगती सीमा, उग्रवादी संगठनों की सक्रियता और सीमा पार घुसपैठ की घटनाओं के कारण यह इलाका लगातार सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी के कई लड़ाके अफगानिस्तान की सीमा से संचालित होते हैं और वहीं से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाते हैं। हालांकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ऐसे आरोपों से इनकार करती रही है।
हाल के महीनों में पाकिस्तान ने आतंकवाद विरोधी अभियानों की रफ्तार तेज कर दी है। सेना का कहना है कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि उग्रवादी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि टीटीपी के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयों से आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों पर कुछ हद तक अंकुश लगाया जा सकता है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी शांति के लिए सुरक्षा और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर निरंतर प्रयास आवश्यक होंगे।


