कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरा। छात्रों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में पढ़ाई पूरी करने के बाद भी युवाओं के सामने रोजगार की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, रोजगार और युवाओं के डेटा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज भारत में शिक्षा का सर्टिफिकेट तब तक पर्याप्त नहीं है, जब तक वह युवा को रोजगार का अवसर नहीं देता।
युवाओं को बताया भारत की सबसे बड़ी ताकत
प्रयागराज में राहुल गांधी ने कहा कि भारत के करीब 40 करोड़ युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे भारत की शक्ति और शान हैं।
राहुल गांधी ने अमेरिका, चीन और रूस जैसी वैश्विक शक्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा हैं। उनके मुताबिक, 21वीं सदी में भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में युवाओं की क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
‘डिग्री है, लेकिन नौकरी नहीं’
राहुल गांधी ने कहा कि परिवार अपने बच्चों की शिक्षा पर लाखों रुपये खर्च करते हैं। छात्र कई वर्षों तक मेहनत करके परीक्षा पास करते हैं और डिग्री या सर्टिफिकेट हासिल करते हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
उन्होंने दावा किया कि देश में रोजगार के अवसरों को लेकर गंभीर समस्या है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि अगर शिक्षा हासिल करने के बाद भी युवाओं को रोजगार नहीं मिलता, तो केवल डिग्री हासिल करने का फायदा क्या है।
उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षा और रोजगार के बीच के अंतर को युवाओं की बड़ी समस्या के तौर पर पेश किया।
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
राहुल गांधी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब कोई छात्र सालों तक तैयारी करता है और परीक्षा के पेपर लीक हो जाते हैं, तो उसकी मेहनत प्रभावित होती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आर्थिक रूप से मजबूत लोगों के लिए परीक्षा व्यवस्था में अनुचित फायदा उठाने की गुंजाइश बन जाती है। राहुल गांधी ने पेपर खरीदने जैसे आरोपों का जिक्र करते हुए परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाया।
उनका कहना था कि परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मेहनत करने वाले हर छात्र को समान अवसर मिले।
Data और AI को लेकर राहुल का फोकस
राहुल गांधी ने अपने भाषण में डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि आने वाली अर्थव्यवस्था में युवाओं का डेटा और उनकी क्षमता दोनों महत्वपूर्ण होंगे।
उन्होंने छात्रों से कहा कि AI को विकसित करने के लिए डेटा की जरूरत होती है। उनके मुताबिक, युवाओं के डेटा और क्षमता का सही इस्तेमाल देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
राहुल गांधी ने इस संदर्भ में युवाओं और डेटा को 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।
युवाओं के डेटा पर भी उठाया सवाल
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि युवाओं का डेटा बड़ी कंपनियों के पास जा रहा है और इसके बावजूद युवाओं को वास्तविक रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट को लेकर भी अपनी राय रखी। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें रील और कंटेंट बनाने की ओर धकेला जा रहा है।
उन्होंने डिलीवरी और ऐप आधारित सेवाओं में काम करने वाले युवाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि युवा अपनी पढ़ाई और डिग्री के बावजूद ऐसे काम करने को मजबूर हो रहे हैं, जिनमें उनकी शिक्षा और क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता।
प्रयागराज में पैतृक घर भी पहुंचे राहुल
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने से पहले राहुल गांधी प्रयागराज एयरपोर्ट पहुंचे, जहां कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के बाद वह आनंद भवन और स्वराज भवन भी पहुंचे।
राहुल गांधी ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। प्रयागराज से उनका पारिवारिक जुड़ाव भी रहा है और उन्होंने कार्यक्रम के दौरान शहर के शिक्षा केंद्र के रूप में पुराने महत्व का जिक्र किया।
रोजगार और शिक्षा पर जारी रहेगी बहस
राहुल गांधी के इस बयान के बाद शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो सकती है। एक तरफ सरकारें युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं की बात करती हैं, वहीं विपक्ष बेरोजगारी और परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठाता रहा है।
प्रयागराज में राहुल गांधी का पूरा संबोधन युवाओं की समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसरों के इर्द-गिर्द रहा। अब देखना होगा कि उनके इन बयानों पर सरकार और सत्तारूढ़ दल की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।


