सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन सोमवार के दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के साथ उन्हें अलग-अलग तरह के सात्विक भोग भी अर्पित करते हैं। अगर आप इस सावन सोमवार पर कुछ मीठा और खास बनाना चाहती हैं, तो सीताफल बासुंदी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
सीताफल बासुंदी दूध और पके हुए सीताफल से तैयार की जाती है। सीताफल में प्राकृतिक मिठास होती है और दूध के साथ इसका स्वाद काफी अच्छा लगता है। व्रत के दौरान किसी भी रेसिपी को बनाते समय अपनी व्रत परंपरा और इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री का ध्यान रखना जरूरी है।
सीताफल बासुंदी बनाने के लिए आपको एक लीटर फुल क्रीम दूध, दो बड़े पके हुए सीताफल, तीन से चार बड़े चम्मच चीनी, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, 10 से 12 केसर के धागे, दो बड़े चम्मच बारीक कटे ड्राई फ्रूट्स और एक छोटा चम्मच चिरौंजी की जरूरत होगी।
सबसे पहले सीताफल को काटकर उसका गूदा निकाल लें और बीजों को सावधानी से अलग कर दें। सीताफल जितना पका और मीठा होगा, बासुंदी का स्वाद उतना ही अच्छा आएगा। तैयार गूदे को अलग रख दें और अब दूध तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करें।
एक भारी तले वाली कड़ाही में फुल क्रीम दूध डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। दूध में उबाल आने के बाद गैस की आंच धीमी कर दें। दूध को बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि वह कड़ाही के तले में चिपके नहीं। इसे तब तक पकाएं जब तक दूध लगभग आधा न रह जाए और अच्छी तरह गाढ़ा न हो जाए।
अब केसर के धागों को थोड़े से गर्म दूध में भिगोकर रखें। जब दूध गाढ़ा हो जाए तो इसमें केसर वाला दूध और इलायची पाउडर डाल दें। इससे बासुंदी में अच्छी खुशबू और स्वाद आएगा। इसके बाद इसमें चीनी डालकर करीब दो मिनट तक पकाएं, ताकि चीनी पूरी तरह घुल जाए।
यहां एक बात का विशेष ध्यान रखना जरूरी है कि सीताफल में प्राकृतिक मिठास होती है। इसलिए चीनी की मात्रा अपने स्वाद के अनुसार कम या ज्यादा रखी जा सकती है। अगर सीताफल बहुत मीठा है, तो कम चीनी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
चीनी घुलने के बाद गैस बंद कर दें और बासुंदी को पूरी तरह ठंडा होने दें। सीताफल का गूदा गर्म दूध में बिल्कुल न मिलाएं, क्योंकि ऐसा करने पर दूध के फटने का खतरा हो सकता है। जब दूध सामान्य तापमान पर आ जाए, तभी इसमें सीताफल का तैयार गूदा डालें।
अब सीताफल के गूदे को ठंडी बासुंदी में हल्के हाथों से मिलाएं। इसे बहुत ज्यादा देर तक तेज गति से चलाने की जरूरत नहीं है। सभी सामग्री अच्छी तरह मिल जाने के बाद ऊपर से बारीक कटे बादाम, पिस्ता और चिरौंजी डालकर इसे सजाया जा सकता है।
बेहतर स्वाद के लिए तैयार सीताफल बासुंदी को करीब एक से दो घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। ठंडी होने के बाद इसका स्वाद और भी अच्छा लगेगा। हालांकि अगर इसे व्रत के भोग के रूप में तैयार कर रहे हैं, तो इस्तेमाल की जाने वाली हर सामग्री अपनी व्रत परंपरा के अनुसार ही चुनें।
बासुंदी तैयार होने के बाद इसे साफ कटोरी में निकालें और भगवान शिव को भोग अर्पित करें। पूजा के बाद परिवार के साथ प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण किया जा सकता है। सावन सोमवार के मौके पर यह दूध और फल से तैयार की जाने वाली एक स्वादिष्ट मिठाई हो सकती है।
सीताफल बासुंदी बनाने की यह रेसिपी ज्यादा मुश्किल नहीं है। इसमें सबसे जरूरी बात दूध को अच्छी तरह गाढ़ा करना और सीताफल का गूदा दूध पूरी तरह ठंडा होने के बाद मिलाना है। इस तरह आप सावन सोमवार के लिए घर पर स्वादिष्ट सीताफल बासुंदी तैयार कर सकती हैं।


