पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। उत्तरी वजीरिस्तान और बन्नू जिलों में करीब 36 घंटे तक चले खुफिया जानकारी पर आधारित कई ऑपरेशन्स में 60 से ज्यादा उग्रवादियों के मारे जाने का दावा किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई में चार प्रमुख कमांडर भी मारे गए हैं। सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, उत्तरी वजीरिस्तान में मंगलवार सुबह से सुरक्षा बलों ने संदिग्ध ठिकानों पर निगरानी शुरू की थी। खुफिया सूचनाओं के आधार पर संभावित ठिकानों की पहचान की गई और इसके बाद लक्षित कार्रवाई की गई। अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने बेहद सावधानी से संदिग्ध इलाकों पर नजर रखी।
इस अभियान में आधुनिक निगरानी तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, पेड़ों और घने इलाकों के नीचे छिपे संदिग्धों की पहचान करने के लिए क्वाडकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया। इससे सुरक्षा बलों को संभावित ठिकानों की निगरानी करने और कार्रवाई के लिए जरूरी जानकारी जुटाने में मदद मिली।
उत्तरी वजीरिस्तान में चलाए गए ऑपरेशन्स के दौरान चार प्रमुख कमांडरों समेत 52 उग्रवादियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने संदिग्ध ठिकानों की लगातार निगरानी के बाद कार्रवाई की थी। अभियान के दौरान कई ऐसे उग्रवादियों को भी निशाना बनाया गया, जिन्होंने मौके से भागने की कोशिश की।
इसके बाद सुरक्षा बलों ने बन्नू जिले में भी कई ऑपरेशन चलाए। बुधवार को हुई इन कार्रवाइयों में 10 उग्रवादियों के मारे जाने और 16 अन्य के घायल होने की जानकारी दी गई है। इस तरह दोनों जिलों में चलाए गए अभियानों में कुल 62 उग्रवादियों के मारे जाने का दावा किया गया है।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन अभियानों को खुफिया जानकारी पर आधारित कार्रवाई बताया है। सुरक्षा बलों को पहले से संदिग्ध गतिविधियों और ठिकानों की जानकारी मिलने की बात कही गई है। इसके बाद निगरानी बढ़ाई गई और उचित जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।
उत्तरी वजीरिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान में आतंकवाद और उग्रवादी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील इलाका रहा है। अफगानिस्तान की सीमा के करीब स्थित होने के कारण इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों की गतिविधियां लगातार बनी रहती हैं। पाकिस्तान में सक्रिय प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों के खिलाफ यहां समय-समय पर अभियान चलाए जाते रहे हैं।
पाकिस्तानी सरकार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के लिए कई बार ‘फितना-अल-खवारिज’ शब्द का इस्तेमाल करती है। सुरक्षा बलों की ताजा कार्रवाई भी इसी संगठन से जुड़े संदिग्ध सदस्यों के खिलाफ बताई गई है। हालांकि, किसी भी सैन्य अभियान में सामने आने वाले आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से महत्वपूर्ण होती है।
इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों की ओर से इलाके में निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही गई है। अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन का उद्देश्य क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों को रोकना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना था।
लगातार 36 घंटे तक चले इन अभियानों में बड़ी संख्या में उग्रवादियों के मारे जाने का दावा पाकिस्तान के सुरक्षा अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर चार प्रमुख कमांडरों के मारे जाने की जानकारी को सुरक्षा बलों के लिए बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश किया गया है।
अब सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मारे गए उग्रवादियों की पहचान क्या थी और उनके नेटवर्क में उनकी क्या भूमिका थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन ठिकानों से जुड़े अन्य लोग कहां मौजूद हैं।
फिलहाल उत्तरी वजीरिस्तान और बन्नू में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। 36 घंटे तक चले इस अभियान ने एक बार फिर दिखाया है कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में आतंकवाद सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस कार्रवाई के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।


