भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी तिरंगे की शान देखने को मिली। भारत के स्वतंत्रता दिवस का जश्न विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों और प्रवासी भारतीय समुदायों ने पूरे उत्साह के साथ मनाया। इस बार खास तौर पर ‘सूर्यपथ तिरंगा’ पहल के जरिए तिरंगे को पूरब से पश्चिम की ओर एक प्रतीकात्मक वैश्विक यात्रा कराई गई। यह पहल संस्कृति मंत्रालय के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का हिस्सा रही, जिसका उद्देश्य भारत और विदेशों में रहने वाले भारतीयों को राष्ट्रीय ध्वज के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह से जोड़ना है।
‘सूर्यपथ तिरंगा’ पहल की शुरुआत प्रशांत महासागर में स्थित फिजी से हुई। भारतीय समयानुसार रात करीब 1 बजकर 30 मिनट पर फिजी की राजधानी सुवा स्थित ‘इंडिया हाउस’ में भारतीय उच्चायुक्त सुनीत मेहता ने तिरंगा फहराया। इसके साथ ही दुनिया के अलग-अलग समय क्षेत्रों में स्थित भारतीय मिशनों में स्वतंत्रता दिवस समारोहों की शुरुआत हुई। फिजी से शुरू हुआ यह प्रतीकात्मक सफर धीरे-धीरे पश्चिम की ओर बढ़ता गया और अलग-अलग देशों में भारतीय मिशनों ने तिरंगा फहराकर भारत की आजादी का जश्न मनाया।
इस वैश्विक अभियान के दौरान न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम, सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड समेत कई देशों में भारतीय समुदाय ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भारतीय राजनयिकों के साथ प्रवासी भारतीयों ने भी स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर देश के प्रति अपनी भावनाओं को जाहिर किया। कई स्थानों पर पारंपरिक भारतीय परिधानों में लोग कार्यक्रमों में पहुंचे और तिरंगा फहराने के साथ देशभक्ति के गीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
एशिया के दूसरे देशों में भी स्वतंत्रता दिवस की धूम देखने को मिली। म्यांमा, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, उज्बेकिस्तान, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और सऊदी अरब में स्थित भारतीय मिशनों में भी तिरंगा फहराया गया। इन कार्यक्रमों के जरिए विदेशों में रह रहे भारतीयों ने भारत के स्वतंत्रता दिवस को अपनी जड़ों और राष्ट्रीय पहचान से जोड़ते हुए मनाया।
इसके बाद ‘सूर्यपथ तिरंगा’ पहल का सफर एशिया से आगे बढ़कर अफ्रीका और यूरोप तक पहुंचा। इथियोपिया, रूस, केन्या, इजराइल, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में भी भारतीय मिशनों ने स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में स्थानीय स्तर पर रहने वाले भारतीय समुदाय और भारतीय मिशन के अधिकारी शामिल हुए। तिरंगा फहराने के साथ भारत की स्वतंत्रता यात्रा, संस्कृति और उपलब्धियों को भी याद किया गया।
यूरोप में भी इस वैश्विक पहल का प्रभाव दिखाई दिया। लातविया, जर्मनी, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, मोरक्को और आइसलैंड सहित कई देशों में भारतीय मिशनों ने स्वतंत्रता दिवस मनाया। अलग-अलग समय क्षेत्रों में जैसे-जैसे सूरज आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे भारतीय मिशनों में तिरंगा फहराने का सिलसिला भी जारी रहा। इसी वजह से ‘सूर्यपथ तिरंगा’ नाम इस पहल को एक खास प्रतीकात्मक अर्थ देता है।
इस अभियान का अंतिम पड़ाव अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को तक पहुंचा। इस तरह प्रशांत क्षेत्र के फिजी से शुरू हुई तिरंगे की यह प्रतीकात्मक यात्रा दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों से गुजरते हुए अमेरिका तक पहुंची। यह पहल केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं रही, बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों को भारत की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय पहचान से जोड़ने का माध्यम भी बनी।
‘हर घर तिरंगा’ अभियान के जरिए भारत में पहले से ही लोगों को अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा है। ‘सूर्यपथ तिरंगा’ ने इसी भावना को वैश्विक स्तर पर विस्तार दिया। दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीयों ने अपने-अपने स्थानों पर तिरंगा फहराकर यह संदेश दिया कि भौगोलिक दूरी चाहे कितनी भी हो, देश के प्रति जुड़ाव और गर्व की भावना सीमाओं से परे होती है। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर फिजी से सैन फ्रांसिस्को तक तिरंगे की यह प्रतीकात्मक यात्रा भारत की वैश्विक मौजूदगी, प्रवासी भारतीयों के जुड़ाव और राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रदर्शित करने वाली खास पहल बन गई।

