तमिलनाडु में चलती ट्रेन से करीब 3 किलो सोना चोरी होने का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस को अपराधियों तक पहुंचाने में एक स्मार्टवॉच ने अहम भूमिका निभाई। चोरी की इस वारदात की जांच के दौरान पुलिस को फेंके गए एक बैग से स्मार्टवॉच मिली और इसी डिवाइस की GPS लोकेशन ने जांच को एक ऐसे आरोपी तक पहुंचा दिया, जो करीब 17 साल से अपराध की दुनिया से दूर था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
मामला तमिलनाडु में ट्रेन से सोने की चोरी से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, एक ट्रेन में सफर कर रहे लोगों के सामान के बीच से सोने से भरा बैग चोरी हो गया था। बैग में करीब 3 किलो सोना होने की बात सामने आई। घटना के बाद रेलवे पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना था कि चलती ट्रेन में इतनी बड़ी चोरी को अंजाम देने वाले आरोपी कौन थे और वे वारदात के बाद कहां चले गए।
जांच के दौरान पुलिस को एक फेंका हुआ बैग मिला। इस बैग की तलाशी के दौरान पुलिस को एक स्मार्टवॉच दिखाई दी। शुरुआत में यह सिर्फ एक सामान्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लग सकती थी, लेकिन जांच के लिए यह स्मार्टवॉच बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। पुलिस ने तकनीकी जानकारी के आधार पर इसकी लोकेशन को ट्रैक करने की कोशिश की और GPS से मिले सुराग के जरिए जांच आगे बढ़ाई।
स्मार्टवॉच की लोकेशन ने पुलिस को उस व्यक्ति तक पहुंचने में मदद की, जिसका संबंध कथित तौर पर चोरी की इस वारदात से था। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस कुख्यात ट्रेन लुटेरे अमरनाथ जायसवाल तक पहुंची। पुलिस के अनुसार, अमरनाथ का नाम पहले भी ट्रेन में चोरी और लूट की कई घटनाओं से जुड़ा रहा है। उसके खिलाफ 2009 से पहले ट्रेन में चोरी के 36 मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अमरनाथ कथित तौर पर करीब 17 साल तक अपराध की दुनिया से दूर रहा। इतने लंबे समय तक उसके खिलाफ किसी नई वारदात की जानकारी सामने नहीं आई थी। लेकिन पुलिस के मुताबिक, इस साल उसने एक बार फिर अपराध की दुनिया में वापसी की और ट्रेन में सोने से भरा बैग चोरी करने की वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस के लिए यह मामला इसलिए भी खास बन गया क्योंकि आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड जांच के दौरान सामने आया। लंबे समय तक अपराध से दूर रहने के बाद दोबारा ट्रेन में चोरी करने की घटना ने जांच अधिकारियों का ध्यान उसके पुराने रिकॉर्ड की ओर खींचा। इसके बाद तकनीकी सुराग और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को जोड़कर पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
जांच में स्मार्टवॉच की भूमिका सबसे अहम रही। आमतौर पर अपराधी वारदात के बाद सबूत मिटाने या सामान फेंकने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस मामले में फेंके गए बैग में मौजूद स्मार्टवॉच ही पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण सुराग बन गई। GPS लोकेशन से मिले संकेतों ने जांच को आगे बढ़ाने में मदद की और आखिरकार पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई।
इसके बाद पुलिस ने अमरनाथ जायसवाल समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी किए गए करीब 3 किलो सोने का क्या हुआ और क्या इस वारदात में और लोग भी शामिल थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों ने ट्रेन में चोरी की योजना कैसे बनाई और यात्रियों के सामान की पहचान किस तरह की।
यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक किस तरह अपराध की जांच में अहम भूमिका निभा सकती है। एक ऐसी स्मार्टवॉच, जिसे आरोपी शायद सामान्य इलेक्ट्रॉनिक सामान समझकर छोड़ गए होंगे, वही पुलिस के लिए जांच की सबसे बड़ी कड़ी बन गई। GPS से मिली जानकारी ने उस पुराने अपराधी तक पहुंचने में मदद की, जिसने करीब 17 साल बाद कथित तौर पर फिर से ट्रेन में चोरी की वारदात शुरू की थी।
फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। करीब 3 किलो सोने की चोरी, 17 साल बाद अपराध की दुनिया में कथित वापसी और एक स्मार्टवॉच के GPS से आरोपी तक पहुंचने की यह पूरी कहानी तमिलनाडु रेलवे पुलिस की जांच में तकनीकी सुराग की अहमियत को दिखाती है। अब पुलिस की कोशिश चोरी किए गए सोने की बरामदगी और इस वारदात से जुड़े बाकी लोगों का पता लगाने की है।


