ड्रोन अब सिर्फ निगरानी करने वाली मशीन नहीं रह गए हैं, बल्कि आधुनिक युद्ध में इनका इस्तेमाल हमला करने, दुश्मन की एयर डिफेंस को चुनौती देने और इंसानी लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर मिशन पूरा करने तक होने लगा है। इसी बदलती युद्ध तकनीक के बीच तुर्किए का ANKA-III ड्रोन खास चर्चा में है। यह एक जेट इंजन से चलने वाला कम रडार सिग्नेचर वाला अनमैन्ड कॉम्बैट एयर व्हीकल है, जिसे तुर्किए भविष्य के हवाई युद्ध के लिए तैयार कर रहा है।
ANKA-III की सबसे खास बात इसकी डिजाइन और हथियार ले जाने की क्षमता है। इसका फ्लाइंग-विंग डिजाइन इसे पारंपरिक ड्रोन से अलग बनाता है। तुर्किए इसे ऐसे प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित कर रहा है, जो निगरानी के साथ-साथ अलग-अलग सैन्य अभियानों में भी इस्तेमाल हो सके। इसमें आंतरिक हथियार बे दिए गए हैं, जिससे हथियार ले जाने के दौरान इसकी कम रडार दृश्यता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
लेकिन कहानी सिर्फ ANKA-III तक सीमित नहीं है। इस ड्रोन के साथ Super Şimşek जैसे जेट-पावर्ड प्लेटफॉर्म को भी जोड़ा गया है। ANKA-III से Super Şimşek के लॉन्च का परीक्षण किया जा चुका है। इसकी ऑपरेशनल रेंज करीब 700 किलोमीटर तक बताई गई है और इसे अलग-अलग सैन्य भूमिकाओं के लिए विकसित किया जा रहा है। यही वजह है कि ANKA-III और Super Şimşek का कॉम्बिनेशन रक्षा क्षेत्र में खास चर्चा का विषय बना हुआ है।
हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है। 700 किलोमीटर की रेंज को सीधे ANKA-III की अपनी उड़ान रेंज मानना सही नहीं होगा। यह क्षमता Super Şimşek जैसे एयर-लॉन्च्ड सिस्टम से जुड़ी बताई जाती है। यानी ANKA-III को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के तौर पर देखा जा रहा है जो लंबी दूरी तक पहुंचने वाले अलग-अलग सिस्टम को अपने साथ लेकर मिशन में इस्तेमाल कर सकता है।
ANKA-III की एक और बड़ी खासियत है MUM-T यानी Manned-Unmanned Teaming। इसका मतलब है कि भविष्य में ड्रोन और इंसानी पायलट वाले विमान एक ही मिशन में मिलकर काम कर सकते हैं। एक पायलट वाला लड़ाकू विमान मिशन को लीड कर सकता है, जबकि उसके साथ उड़ने वाले ड्रोन निगरानी, डिकॉय, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर या दूसरे मिशनों में भूमिका निभा सकते हैं।
तुर्किए पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। ANKA-III को भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल एक सामान्य ड्रोन तैयार करना नहीं, बल्कि भविष्य के नेटवर्क-केंद्रित हवाई युद्ध के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना है जो अलग-अलग सिस्टम के साथ मिलकर काम कर सके।
इस पूरे घटनाक्रम को तुर्किए और इजराइल के बीच चल रही राजनीतिक तनातनी के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच लंबे समय से तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। ऐसे समय में तुर्किए की नई रक्षा तकनीक सामने आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा और बढ़ जाती है।
हालांकि ANKA-III को किसी खास देश के खिलाफ बनाया गया हथियार बताना सही नहीं होगा। इसका विकास तुर्किए की अपनी रक्षा और एयरोस्पेस क्षमता को मजबूत करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। लेकिन जिस तेजी से ड्रोन तकनीक विकसित हो रही है, उसमें इस तरह के सिस्टम भविष्य के युद्ध की तस्वीर जरूर बदल सकते हैं।
आधुनिक युद्ध में अब महंगे लड़ाकू विमानों के साथ अनमैन्ड सिस्टम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे हैं। अगर ड्रोन इंसानी लड़ाकू विमानों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करने लगें, तो कई जोखिम भरे मिशनों में पायलटों की भूमिका को कम किया जा सकता है। यही सोच ANKA-III जैसे प्लेटफॉर्म के विकास के पीछे भी दिखाई देती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ANKA-III और इससे जुड़े सिस्टम आने वाले समय में तुर्किए को हवाई युद्ध में एक नई बढ़त दिला पाएंगे। फिलहाल यह तकनीक विकास और परीक्षण के अलग-अलग चरणों से गुजर रही है, इसलिए इसके वास्तविक युद्धक प्रदर्शन का आकलन करना जल्दबाजी होगी। लेकिन 700 किलोमीटर तक की क्षमता वाले एयर-लॉन्च्ड सिस्टम और ANKA-III जैसे आधुनिक कॉम्बैट ड्रोन का संयोजन यह जरूर दिखाता है कि भविष्य का हवाई युद्ध पहले से काफी अलग होने वाला है।


