प्रयागराज में लगातार बारिश के बाद कई इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शहर में जलभराव को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार के विकास कार्यों पर सवाल उठाते हुए तंज कसा और पूछा कि क्या अब प्रयागराज का नाम बदलकर ‘जलराजनगर’ किया जाएगा।
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में प्रयागराज में हुए विकास कार्यों और महाकुंभ के दौरान खर्च किए गए धन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि महाकुंभ के नाम पर प्रयागराज के तथाकथित ‘स्मार्ट डेवलपमेंट’ के लिए करीब एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसी के साथ उन्होंने शहर में बारिश के बाद दिखाई दे रहे जलभराव को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर कटाक्ष किया।
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में विकास कार्यों को लेकर तीखा राजनीतिक व्यंग्य करते हुए कहा कि शहर को ‘दिव्य’ बनाने की बात कही गई थी, लेकिन अब हर तरफ ‘द्रव्य’ दिखाई दे रहा है। इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि क्या इलाहाबाद का नाम एक बार फिर बदलकर प्रयागराज से ‘जलराजनगर’ कर दिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई।
दरअसल, प्रयागराज में बारिश के बाद कई स्थानों पर पानी जमा होने की शिकायतें सामने आई हैं। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़कें पानी से भर जाने के कारण आवागमन भी प्रभावित हुआ है। इसी स्थिति को लेकर विपक्ष ने सरकार की तैयारियों और शहर में कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं।
मामला अब न्यायपालिका तक भी पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज में जलभराव की स्थिति का स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने जिला प्रशासन से इस मामले में जवाब तलब किया है। इसके साथ ही अदालत ने जलभराव की समस्या को रोकने के लिए किए गए इंतजामों और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना को लेकर हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान के बाद प्रशासन के सामने अब यह बताने की जिम्मेदारी है कि शहर में जलभराव रोकने के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई थीं और भारी बारिश के दौरान वे कितनी प्रभावी साबित हुईं। अदालत भविष्य के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की जानकारी भी मांग रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ऐसी स्थिति दोबारा पैदा होने पर प्रशासन किस तरह उससे निपटेगा।
प्रयागराज में जलभराव का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शहर में हाल के वर्षों में बड़े स्तर पर विकास कार्य किए गए हैं। महाकुंभ से पहले और उसके दौरान शहर के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम हुआ था। ऐसे में बारिश के बाद सामने आई जलभराव की तस्वीरों ने इन परियोजनाओं की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि बड़े पैमाने पर विकास कार्यों और खर्च के बावजूद अगर शहर में बारिश के बाद जलभराव की गंभीर समस्या बनी रहती है, तो प्रशासन की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा जरूरी है। वहीं सरकार और प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या जवाब दिया जाता है, यह हाईकोर्ट में होने वाली आगे की सुनवाई में सामने आएगा।
अखिलेश यादव का ‘जलराजनगर’ वाला तंज इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा है। उन्होंने जलभराव को लेकर सरकार की कथित विकास योजनाओं पर सवाल उठाते हुए इसे भ्रष्टाचार से जोड़कर निशाना साधा है। हालांकि उनके आरोप राजनीतिक हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
अब इस पूरे मामले में दो स्तर पर नजर बनी हुई है। एक तरफ प्रयागराज में जलभराव की समस्या से लोगों को राहत दिलाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रशासन को अपने इंतजाम और भविष्य की कार्ययोजना का जवाब देना है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रयागराज का जलभराव सिर्फ बारिश से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक तैयारियों का भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।


