भारत के ऑपरेशन सिंदूर की इनसाइड स्टोरी पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Declassified: Operation Sindoor’ इन दिनों चर्चा में है। दो हिस्सों वाली इस डॉक्यूमेंट्री में ऑपरेशन सिंदूर की योजना, सैन्य तैयारियों, रणनीतिक फैसलों और भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव को उन अधिकारियों और विशेषज्ञों के नजरिए से दिखाया गया है, जो इस घटनाक्रम से जुड़े रहे।
डॉक्यूमेंट्री की कहानी अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू होती है। हमले के बाद भारत के सैन्य और सुरक्षा नेतृत्व के सामने बड़ा सवाल था कि इसके पीछे मौजूद आतंकी नेटवर्क और उसके इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ किस तरह कार्रवाई की जाए। शो में उस दौर के रणनीतिक फैसलों और सैन्य तैयारियों को विस्तार से दिखाने की कोशिश की गई है।
इसके बाद कहानी 7 मई 2025 को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर तक पहुंचती है। डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक यह अभियान करीब 88 घंटे तक चला। इसमें ऑपरेशन की प्लानिंग, टारगेट चयन, निगरानी, सैन्य तैयारियों और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल जैसे पहलुओं पर फोकस किया गया है।
डॉक्यूमेंट्री की खास बात यह है कि इसमें भारतीय सैन्य और सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों के अनुभव और बयान शामिल किए गए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की बातचीत भी इसमें दिखाई गई है, जिसमें पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया और उसके बाद लिए गए रणनीतिक फैसलों का जिक्र किया गया है।
शो के सामने आने के बाद पाकिस्तान की तरफ से भी प्रतिक्रिया सामने आई। पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता यानी ISPR ने डॉक्यूमेंट्री में दिखाए गए घटनाक्रम और भारत की ओर से किए गए कई दावों को खारिज किया। पाकिस्तान की तरफ से इसे भारतीय पक्ष का एकतरफा और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया विवरण बताया गया।
यही वजह है कि ऑपरेशन सिंदूर की यह डॉक्यूमेंट्री अब सिर्फ एक सैन्य अभियान की कहानी नहीं रह गई है। यह भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे नैरेटिव वॉर का भी हिस्सा बन गई है। भारत की ओर से डॉक्यूमेंट्री में अपना पक्ष रखा गया है, जबकि पाकिस्तान की सेना ने इसके कई दावों पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि दर्शकों के लिए यह समझना जरूरी है कि डॉक्यूमेंट्री को किसी स्वतंत्र जांच रिपोर्ट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें मुख्य रूप से भारतीय अधिकारियों और विशेषज्ञों का पक्ष सामने आता है। वहीं पाकिस्तान ने इसके कई दावों को चुनौती दी है। इसलिए ऑपरेशन सिंदूर की पूरी तस्वीर समझने के लिए दोनों देशों के आधिकारिक बयानों के साथ स्वतंत्र रूप से उपलब्ध तथ्यों को भी देखना जरूरी है।
इस डॉक्यूमेंट्री की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ऑपरेशन के दौरान लिए गए फैसलों और सैन्य रणनीति पर चर्चा की गई है। इससे दर्शकों को उस समय की परिस्थितियों और भारत की रणनीतिक सोच को समझने का एक अलग नजरिया मिलता है।
फिलहाल ‘Declassified: Operation Sindoor’ ने 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है। एक तरफ भारत इसे अपने सैन्य अभियान और रणनीतिक फैसलों के विस्तृत पक्ष के रूप में सामने रख रहा है, वहीं पाकिस्तान इसके दावों को चुनौती दे रहा है।
ऐसे में इस पूरी कहानी को समझने के लिए जरूरी है कि भावनाओं और दावों से अलग हटकर तथ्यों, आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी पर ध्यान दिया जाए। आने वाले समय में इस डॉक्यूमेंट्री से जुड़े और भी खुलासे और दोनों देशों की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।


