महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा से जुड़ा नियम अब चर्चा में है। राज्य सरकार ने व्यावसायिक रूप से वाहन चलाने वाले ड्राइवरों के लिए व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान जरूरी किया है। इसी नियम के तहत मुंबई और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी चालकों की जांच की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, मराठी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने के कारण 1,268 ऑटो-टैक्सी चालकों को नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में कुल 3,995 व्यावसायिक चालकों की जांच की। जांच के दौरान जिन ड्राइवरों को निर्धारित भाषा संबंधी मानक पूरा करते हुए नहीं पाया गया, उनके खिलाफ नोटिस की कार्रवाई की गई।
सरकार की ओर से इस पहल के पीछे मुख्य वजह यात्रियों और ड्राइवरों के बीच संवाद को बेहतर बनाना बताई गई है। महाराष्ट्र में रोजाना लाखों लोग ऑटो-रिक्शा और टैक्सी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि ड्राइवरों को स्थानीय भाषा की बुनियादी समझ होने से यात्रियों से बातचीत, पता समझने और यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी देने में आसानी होगी।
यह नियम खास तौर पर व्यावसायिक वाहन चालकों पर लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों से बातचीत करते समय ड्राइवर सामान्य मराठी भाषा को समझ और बोल सकें। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ड्राइवर को मराठी का उच्च स्तर का ज्ञान होना जरूरी है। फोकस व्यावहारिक और रोजमर्रा के संवाद पर बताया जा रहा है।
मुंबई जैसे महानगर में अलग-अलग राज्यों और भाषाई पृष्ठभूमि से आए लोग बड़ी संख्या में काम करते हैं। ऑटो और टैक्सी सेक्टर में भी दूसरे राज्यों से आने वाले ड्राइवरों की संख्या काफी है। ऐसे में भाषा से जुड़ा यह नियम लागू करना प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती हो सकता है।
अब 1,268 चालकों को नोटिस मिलने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन ड्राइवरों को मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं है, उनके लिए आगे की प्रक्रिया क्या होगी। क्या उन्हें भाषा सीखने का समय दिया जाएगा या फिर नियमों के तहत सीधे लाइसेंस और परमिट से जुड़ी कार्रवाई होगी, यह संबंधित दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा।
सरकार की इस पहल को जहां स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर बहस भी शुरू हो सकती है। खासकर उन ड्राइवरों के बीच जो लंबे समय से मुंबई और महाराष्ट्र में काम कर रहे हैं लेकिन मराठी भाषा में सहज नहीं हैं।
सरकार का तर्क है कि यात्रियों की सुविधा और बेहतर संवाद के लिए ड्राइवरों का स्थानीय भाषा का व्यावहारिक ज्ञान जरूरी है। वहीं ड्राइवरों के लिए यह जरूरी होगा कि वे नियमों को समझें और अगर भाषा संबंधी कोई कमी है तो उसे समय रहते पूरा करें।
फिलहाल 3,995 चालकों की जांच और 1,268 को नोटिस जारी किए जाने से यह साफ है कि महाराष्ट्र में इस नियम को लेकर प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी है। आने वाले दिनों में इस अभियान का दायरा और बढ़ सकता है।


