भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने Max Financial Services, Max Life Insurance और Axis Group से जुड़े करीब 3,911 करोड़ रुपये के कथित शेयरधारक नुकसान वाले मामले में बड़ी राहत दी है। बाजार नियामक ने कहा है कि मामले में लगाए गए खुलासा संबंधी उल्लंघन और धोखाधड़ी की योजना के आरोप पर्याप्त सबूतों के अभाव में साबित नहीं हो पाए। इसके साथ ही कई कंपनियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया है।
यह मामला कई साल पुराने लेनदेन से जुड़ा हुआ था। SEBI की जांच में 2009-10 से 2021-22 के बीच Max और Axis Group की कंपनियों के बीच हुए अलग-अलग समझौतों को देखा गया था। जांच का फोकस मुख्य रूप से 2010, 2015 और 2020 में हुए तीन प्रमुख समझौतों पर था।
आरोप था कि इन लेनदेन के बारे में Max Financial की तरफ से पर्याप्त और समय पर जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया था कि Max Group की कंपनियों और उनके शेयरधारकों के हितों को नुकसान पहुंचाकर Axis Group की कंपनियों को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए एक पूरी योजना तैयार की गई थी।
इस मामले में सबसे बड़ा आंकड़ा 3,911.95 करोड़ रुपये का था। कारण बताओ नोटिस में आरोप लगाया गया था कि इन लेनदेन की वजह से Max Financial के शेयरधारकों को कथित तौर पर इतनी बड़ी रकम का नुकसान हुआ और लगभग इतनी ही राशि का लाभ Axis Group की कंपनियों को मिला। हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि ये आरोप कारण बताओ नोटिस में लगाए गए थे और बाद में SEBI की अंतिम जांच में इन्हें साबित नहीं किया जा सका।
मामले की शुरुआत 24 अक्टूबर 2024 को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस से हुई थी। इसके बाद संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों से जवाब मांगा गया और पूरे मामले की नियामकीय जांच आगे बढ़ी। अब SEBI के अंतिम आदेश में कहा गया है कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं है।
SEBI ने 2010 के समझौते को भी जांच के दायरे में रखा था। उस समय Max Life के शेयर Axis Bank को अंकित मूल्य पर जारी किए गए थे और बाद में अलग-अलग चरणों में उन शेयरों की खरीदारी ज्यादा कीमतों पर हुई। इसके बाद 2015 में Max Financial, Mitsui Sumitomo Insurance और Axis Bank के बीच Max Life की करीब 4.99 प्रतिशत हिस्सेदारी से जुड़ा समझौता हुआ।
2020 के समझौते में भी Axis Bank द्वारा Max Life में करीब 29 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की योजना शामिल थी। हालांकि बाद में नियामकीय चर्चाओं के बाद इस समझौते में बदलाव किया गया और 2021 में Axis Group की कंपनियों ने Max Life में हिस्सेदारी खरीदी।
SEBI के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या इन सभी लेनदेन को इस तरह डिजाइन किया गया था जिससे Axis Group को अनुचित आर्थिक लाभ मिले और Max Financial के शेयरधारकों को नुकसान हो। लेकिन अंतिम आदेश में नियामक ने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी वाली योजना साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
SEBI ने यह भी कहा कि Max Financial की तरफ से किए गए खुलासे और बेहतर हो सकते थे और ज्यादा सतर्क रवैया अपनाना उचित होता। लेकिन किसी कंपनी के खुलासे को उस समय लागू कानून और नियामकीय प्रावधानों के आधार पर ही परखा जाना चाहिए। सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं है कि खुलासा और बेहतर हो सकता था, जब तक संबंधित नियमों के उल्लंघन को साबित करने वाली ठोस सामग्री मौजूद न हो।
धोखाधड़ी के आरोपों की जांच के दौरान SEBI को जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का पर्याप्त सबूत नहीं मिला। इसके अलावा शेयर की कीमत या कारोबार की मात्रा में हेरफेर, कृत्रिम बाजार बनाने या बाजार की निष्पक्षता में किसी अन्य तरह का हस्तक्षेप किए जाने का भी पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं आया।
यही वजह है कि Max Financial, Max Life, Axis Bank, Axis Capital और Axis Securities से जुड़े धोखाधड़ी की योजना वाले आरोप भी अंतिम आदेश में कायम नहीं रह सके। साथ ही Max Financial के अलग-अलग समय में नेतृत्व करने वाले प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप भी मूल आरोप साबित नहीं होने के कारण टिक नहीं पाए।
इस फैसले से Max Group और Axis Group से जुड़े पक्षों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि मामले से जुड़ी सभी कार्यवाहियां पूरी तरह एक जैसी स्थिति में नहीं हैं। SEBI के मुताबिक कारण बताओ नोटिस कुल 25 इकाइयों को जारी किए गए थे और Max Financial के 13 गैर-कार्यकारी या स्वतंत्र निदेशकों ने निपटान के लिए आवेदन किया है। इन आवेदनों पर प्रक्रिया अभी चल रही है।
यानी 3,911 करोड़ रुपये का यह मामला बेहद बड़ा जरूर था, लेकिन अंतिम नियामकीय निष्कर्ष में आरोप साबित नहीं हो पाए। SEBI ने साफ किया कि सिर्फ किसी लेनदेन में संभावित तौर पर बेहतर खुलासा किया जा सकता था, इससे अपने आप धोखाधड़ी या शेयरधारकों को नुकसान पहुंचाने की साजिश साबित नहीं होती।
अब इस फैसले की सबसे बड़ी अहमियत यही है कि वर्षों पुराने कॉर्पोरेट लेनदेन में आरोपों को साबित करने के लिए ठोस कानूनी और तथ्यात्मक सबूत कितने जरूरी हैं। SEBI ने अपने आदेश में उस समय लागू नियमों और उपलब्ध सामग्री को आधार बनाया है। फिलहाल Max Financial और Axis Group से जुड़े इस 3,911 करोड़ रुपये के कथित शेयरधारक नुकसान मामले में बड़ी नियामकीय कार्यवाही समाप्त हो गई है।


