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Kidney Damage के ये संकेत न करें Ignore! आंखों के नीचे सूजन और यूरिन में झाग दिखे तो रहें सावधान

किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसका काम सिर्फ पेशाब बनाना नहीं, बल्कि खून से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना, शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखना और कई जरूरी शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करना भी है। समस्या यह है कि किडनी की बीमारी शुरुआती दौर में अक्सर चुपचाप बढ़ती रहती है और इसके लक्षण इतने सामान्य हो सकते हैं कि लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि शरीर में दिखाई देने वाले कुछ बदलावों को समझना और जरूरत पड़ने पर समय रहते जांच कराना बेहद जरूरी है।

किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर सुबह उठने के बाद आंखों के आसपास या चेहरे पर सूजन दिखाई दे सकती है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि किडनी शरीर से अतिरिक्त नमक और पानी को पर्याप्त रूप से बाहर नहीं निकाल पा रही हो। हालांकि आंखों के नीचे सूजन सिर्फ किडनी की बीमारी का संकेत नहीं होती। नींद की कमी, एलर्जी, ज्यादा नमक खाना या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके कारण हो सकती हैं। इसलिए लगातार या बिना किसी स्पष्ट वजह के रहने वाली सूजन को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।

एक और संकेत यूरिन में बार-बार झाग या फोम दिखाई देना हो सकता है। कभी-कभी तेज धार से पेशाब करने पर भी झाग बन सकता है और यह सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर यूरिन में लगातार या असामान्य रूप से ज्यादा झाग दिखाई दे, तो यह पेशाब में प्रोटीन आने की ओर इशारा कर सकता है। किडनी में मौजूद फिल्टर जब ठीक से काम नहीं करते, तो प्रोटीन यूरिन के जरिए बाहर निकल सकता है। ऐसी स्थिति में जांच कराना जरूरी हो सकता है।

किडनी की समस्या में पेशाब करने की आदतों में भी बदलाव दिखाई दे सकते हैं। किसी व्यक्ति को सामान्य से ज्यादा या कम बार पेशाब आ सकता है। रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना भी कुछ लोगों में देखा जा सकता है। पेशाब का रंग, मात्रा या पैटर्न बदलना भी ध्यान देने योग्य हो सकता है। हालांकि इन बदलावों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए सिर्फ इन लक्षणों के आधार पर किडनी की बीमारी मान लेना सही नहीं है।

किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लग सकते हैं। इससे थकान, कमजोरी, ध्यान लगाने में परेशानी या सामान्य काम करने में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। अगर बिना ज्यादा मेहनत किए लगातार थकान महसूस हो रही है और इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण समझ नहीं आ रहा, तो इसे लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कुछ लोगों में भूख कम लगना, मतली या उल्टी जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। शरीर में अपशिष्ट पदार्थों का स्तर बढ़ने पर पाचन और भूख पर असर पड़ सकता है। इसी तरह त्वचा में खुजली या रूखापन भी कुछ किडनी रोगियों में देखा जाता है। ये लक्षण कई दूसरी स्थितियों में भी हो सकते हैं, इसलिए इनके आधार पर खुद से बीमारी का निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

पैरों, टखनों या हाथों में सूजन भी शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने का संकेत हो सकती है। खासकर अगर सूजन बार-बार हो रही है या इसके साथ पेशाब में बदलाव और सांस फूलने जैसी समस्या भी हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। हालांकि ऐसी सूजन हृदय, लिवर या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़ी हो सकती है।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए रोजमर्रा की जीवनशैली का भी बड़ा महत्व है। संतुलित आहार लेना, जरूरत से ज्यादा नमक से बचना, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करना और धूम्रपान से दूर रहना मददगार हो सकता है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार बीमारी को नियंत्रित रखना विशेष रूप से जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आंखों के नीचे सूजन या यूरिन में झाग दिखने का मतलब सीधे तौर पर किडनी खराब होना नहीं है। लेकिन अगर ऐसे लक्षण लगातार बने रहें, बढ़ते जाएं या इनके साथ पेशाब में खून, पैरों में ज्यादा सूजन, सांस लेने में परेशानी, तेज कमजोरी या पेशाब की मात्रा में बड़ा बदलाव दिखाई दे, तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करना चाहिए। किडनी की समस्या का पता लगाने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड और यूरिन टेस्ट जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

इसलिए शरीर के इन संकेतों को डरने की वजह नहीं, बल्कि समय रहते ध्यान देने का संकेत समझें। किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में कई बार स्पष्ट लक्षण नहीं देती, इसलिए जोखिम वाले लोगों में नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

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