भारत की खाद की जरूरतों के बीच चीन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। चीन भारत के हालिया यूरिया आयात टेंडर के लिए करीब 12 लाख टन यूरिया भेजने की तैयारी में है। यह मात्रा भारत के इस टेंडर में बुक हुई कुल खेप के बड़े हिस्से के बराबर बताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, 24 सितंबर तक चीन के बंदरगाहों से यूरिया से लदे जहाज भारत के लिए रवाना होने की तैयारी में हैं।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले चीन ने घरेलू किसानों के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध रखने के मकसद से यूरिया के निर्यात पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था। लेकिन अब चीन ने निर्यात में ढील देते हुए भारत जैसे बड़े बाजारों के लिए यूरिया की सप्लाई बढ़ाने का रास्ता खोला है। चीन दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उत्पादकों में शामिल है और उसके इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय खाद बाजार पर भी पड़ सकता है।
भारत में यूरिया की मांग काफी ज्यादा है और सरकार किसानों को सब्सिडी के जरिए कम कीमत पर खाद उपलब्ध कराती है। ऐसे में घरेलू उत्पादन के अलावा आयात भी देश की खाद सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वैश्विक स्तर पर खाद की सप्लाई पर दबाव के बीच चीन से बड़ी मात्रा में यूरिया मिलने से भारत की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
भारत के हालिया यूरिया टेंडर में चीन की हिस्सेदारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इस बार चीन से आने वाली संभावित मात्रा करीब 12 लाख टन बताई जा रही है। यानी भारत के लिए यह कोई छोटी-मोटी शिपमेंट नहीं है। हालांकि अंतिम मात्रा टेंडर आवंटन, अनुबंध, चीनी निर्यात मंजूरी और जहाजों की वास्तविक आवाजाही पर निर्भर करेगी। इसलिए फिलहाल इसे संभावित सप्लाई के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।
चीन ने यूरिया निर्यात के लिए अपने कोटे में भी बढ़ोतरी की है। ऐसे में भारत के लिए प्रस्तावित 12 लाख टन की खेप काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर यह पूरी खेप समय पर भारत पहुंचती है तो देश में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा संबंध किसानों और आगामी फसल सीजन से भी है। भारत में यूरिया का इस्तेमाल मुख्य रूप से नाइट्रोजन उर्वरक के रूप में किया जाता है और धान, गेहूं, गन्ना तथा कपास जैसी प्रमुख फसलों के लिए इसकी मांग काफी ज्यादा रहती है। ऐसे में समय पर यूरिया की उपलब्धता किसानों के लिए बेहद अहम है। रबी सीजन से पहले पर्याप्त खाद का इंतजाम सरकार के लिए भी बड़ी प्राथमिकता रहता है।
भारत लगातार घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन देश की बड़ी जरूरत को देखते हुए आयात भी जरूरी रहता है। सरकार अलग-अलग देशों से वैश्विक टेंडर के जरिए यूरिया की आपूर्ति सुरक्षित करने की रणनीति अपनाती है। ऐसे में चीन से आने वाली बड़ी खेप भारत के खाद प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि चीन से प्रस्तावित 12 लाख टन यूरिया की सप्लाई कितनी तेजी से भारत पहुंचती है और वैश्विक बाजार में चीन की बढ़ी हुई मौजूदगी का खाद की कीमतों पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल इतना जरूर है कि जिस चीन ने पहले यूरिया निर्यात पर सख्ती की थी, वही अब भारत के बड़े टेंडर में बड़ी मात्रा में यूरिया सप्लाई करने की तैयारी में है। भारतीय किसानों के लिए समय पर खाद की उपलब्धता के लिहाज से यह घटनाक्रम काफी अहम माना जा रहा है।


