मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन यानी MCA के परिसर में चलने वाले खाने-पीने के ठिकानों के फूड लाइसेंस सस्पेंड करने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि नियमों का पालन कराना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई करते समय व्यावहारिक और संतुलित रवैया अपनाना भी उतना ही जरूरी है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने FDA की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर समस्या का समाधान बेहद सख्त कार्रवाई नहीं हो सकता।
दरअसल, FDA ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के परिसर में चलने वाले पांच खाने-पीने के ठिकानों के फूड लाइसेंस सस्पेंड कर दिए थे। MCA ने FDA की इस कार्रवाई को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी और दलील दी कि बाद की जांच में इन प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी नियमों का बड़े स्तर पर पालन पाया गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोबारा निरीक्षण कराने का निर्देश दिया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन फूड आउटलेट्स की मौजूदा स्थिति क्या है। दोबारा जांच के बाद FDA की ओर से अदालत में रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में करीब 98 प्रतिशत नियमों का पालन पाया गया। ताजा रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने लाइसेंस सस्पेंड रखने के फैसले पर सवाल उठाया और कहा कि अगर अब प्रतिष्ठान नियमों के अनुरूप हैं, तो उन्हें कारोबार करने से रोकने का औचित्य क्या है।
सुनवाई के दौरान अदालत FDA के रवैये से नाराज नजर आई। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को पहले ही व्यावहारिक नजरिया अपनाने के लिए कहा गया था, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने मामले को बेहद तकनीकी और कठोर तरीके से देखा। अदालत का कहना था कि कानून का पालन कराना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जो समस्या के अनुपात में हो।
इसी दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “मच्छर मारने के लिए तलवार मत चलाओ।” अदालत का इशारा इस बात की तरफ था कि किसी नियम के उल्लंघन पर कार्रवाई जरूरी हो सकती है, लेकिन कार्रवाई इतनी कठोर नहीं होनी चाहिए कि समस्या से कहीं ज्यादा नुकसान हो जाए। कोर्ट ने प्रशासन को कानून लागू करते समय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर संतुलित रवैया अपनाने की नसीहत दी।
FDA की ओर से अदालत को बताया गया कि विभाग MCA परिसर में चलने वाले पांचों फूड आउटलेट्स के लाइसेंस सस्पेंड करने का आदेश वापस लेगा। इसके बाद हाईकोर्ट ने सस्पेंशन आदेश हटाने का रास्ता साफ कर दिया। इससे इन प्रतिष्ठानों को दोबारा अपना कारोबार और सेवाएं जारी रखने में राहत मिली।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खाद्य सुरक्षा लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। अदालत ने नियमों के पालन की जरूरत से इनकार नहीं किया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि नियम लागू करने वाली एजेंसियों को कार्रवाई करते समय उचित प्रक्रिया और संतुलन बनाए रखना चाहिए। अगर किसी प्रतिष्ठान में कमियां पाई जाती हैं तो उन्हें सुधारने का मौका और स्थिति के अनुरूप कार्रवाई भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल MCA के इन फूड आउटलेट्स को बड़ी राहत मिली है और FDA को पुराने सस्पेंशन आदेश वापस लेने का निर्देश दिया गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट की “मच्छर मारने के लिए तलवार” वाली टिप्पणी अब इस मामले की सबसे चर्चित बात बन गई है। अदालत का संदेश साफ है कि नियमों का पालन कराना जरूरी है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई जरूरत से ज्यादा कठोर नहीं होनी चाहिए।


