राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई है। फिल्म को लेकर रिलीज से पहले काफी चर्चा थी, लेकिन सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या कम रहने से फिल्म की कमाई उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। अब दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी ने फिल्म के कमजोर बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और उनका बयान चर्चा में आ गया है।
75 वर्षीय शबाना आज़मी ने कहा कि उन्हें फिल्म की तारीफ और उसके बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन के बीच का अंतर समझ नहीं आ रहा है। अभिनेत्री के मुताबिक, उनके आसपास कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने फिल्म देखने के बाद उनसे कहा कि उन्हें कहानी और इसका संदेश पसंद आया। खास तौर पर मौजूदा दौर में इंसानियत और आपसी भाईचारे की बात करने वाली फिल्म को उन्होंने जरूरी बताया। लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में दर्शक फिल्म देखने थिएटर तक नहीं पहुंचे।
शबाना आज़मी ने बातचीत के दौरान फिल्म के मुख्य किरदार को लेकर भी एक अहम सवाल उठाया। उनके मुताबिक, संभव है कि दर्शक सनी देओल को एक भारतीय मुस्लिम किरदार के रूप में स्वीकार नहीं कर पाए। फिल्म में सनी देओल ने सिकंदर मिर्जा नाम का किरदार निभाया है। शबाना ने इसकी तुलना अमिताभ बच्चन के उन किरदारों से की, जिनमें उन्होंने मुस्लिम किरदार निभाए और दर्शकों ने उन्हें आसानी से स्वीकार किया।
अभिनेत्री ने कहा कि अमिताभ बच्चन ने कई फिल्मों में मुस्लिम किरदार निभाए और दर्शकों ने उन्हें उस रूप में स्वीकार किया। उन्होंने ‘दीवार’ में 786 के बिल्ले का उदाहरण भी दिया। शबाना के मुताबिक, यही बात उन्हें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर सनी देओल के मुस्लिम किरदार को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया अलग क्यों रही।
शबाना आज़मी ने यह भी कहा कि फिल्म देखने वाले कुछ लोगों के बीच सनी देओल के किरदार को लेकर भ्रम देखने को मिला। उनके मुताबिक, कुछ दर्शक यह समझ रहे हैं कि सनी देओल फिल्म में पाकिस्तानी व्यक्ति का किरदार निभा रहे हैं, जबकि उनके अनुसार ऐसा नहीं है। अभिनेत्री ने कहा कि यह गलतफहमी भी फिल्म की प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
फिल्म को लेकर पाकिस्तानी अभिनेत्री बुशरा अहमद की प्रतिक्रिया का भी शबाना आज़मी ने जिक्र किया। उनके मुताबिक, बुशरा ने फिल्म में इस्तेमाल किए गए पंजाबी लहजे पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि फिल्म के विलेन द्वारा इस्तेमाल किया गया पंजाबी उच्चारण सही नहीं है। शबाना ने इस स्थिति को दिलचस्प बताते हुए कहा कि अगर दोनों तरफ के लोगों को फिल्म पसंद नहीं आ रही है, तो शायद फिल्म ने किसी संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय को छुआ है।
‘बंटवारा 1947’ को लेकर शबाना आज़मी ने यह भी कहा कि मौजूदा माहौल में भारत और पाकिस्तान से जुड़े विषय को छूना आसान नहीं है। उनके मुताबिक, फिल्म राजनीतिक रूप से गलत नहीं है और इसमें इंसानियत का संदेश देने की कोशिश की गई है। उन्होंने सनी देओल के अभिनय की भी तारीफ करते हुए कहा कि अभिनेता ने अपने किरदार को बहुत अच्छी तरह निभाया है।
फिल्म में सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी लंबे समय बाद एक साथ नजर आई है। इससे पहले दोनों ‘घातक’ और ‘दामिनी’ जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं। इसके अलावा फिल्म के जरिए प्रीति जिंटा ने भी लंबे अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी की है। फिल्म से जुड़े इन नामों के कारण दर्शकों और इंडस्ट्री में इसके लिए काफी उम्मीदें थीं।
हालांकि बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का प्रदर्शन कमजोर रहा। 14 अगस्त को रिलीज हुई ‘बंटवारा 1947’ की कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, जबकि उसी दिन रिलीज हुई ‘आवारापन 2’ ने बेहतर प्रदर्शन किया। ऐसे में अब शबाना आज़मी का बयान फिल्म की असफलता को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है। आखिर फिल्म की कहानी दर्शकों तक क्यों नहीं पहुंच पाई और क्या सनी देओल के किरदार को लेकर बनी धारणा ने इसकी कमाई को प्रभावित किया, यह सवाल फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है।


