जब भी हम पैकेटबंद खाना खरीदते हैं, तो अक्सर हमारी नजर सबसे पहले कीमत, ब्रांड और स्वाद पर जाती है। लेकिन जिस चीज को सबसे ज्यादा ध्यान से देखना चाहिए, यानी उसकी निर्माण तारीख, एक्सपायरी डेट और ‘बेस्ट बिफोर’ तारीख, उसे कई बार नजरअंदाज कर दिया जाता है। यही लापरवाही आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। हाल के मामलों ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि कहीं एक्सपायरी खाद्य पदार्थों की तारीख बदलकर उन्हें दोबारा तो नहीं बेचा जा रहा।
मुंबई के नवी मुंबई स्थित तुर्भे इलाके में खाद्य एवं औषधि प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई के दौरान एक पैकेजिंग परिसर से हजारों कार्टन एक्सपायरी खाद्य पदार्थ बरामद किए गए। सामने आई जानकारी के मुताबिक, करीब 4,942 कार्टन सामान मिला, जिसकी कीमत 75 लाख रुपये से ज्यादा बताई गई। आरोप है कि इन खाद्य पदार्थों की निर्माण और समाप्ति तारीखों में छेड़छाड़ की गई थी।
इसी तरह दिल्ली के ओखला औद्योगिक क्षेत्र में भी एक्सपायरी खाद्य पदार्थों की बिक्री, तारीखों में बदलाव और दोबारा पैकिंग से जुड़ा मामला सामने आया था। इस कार्रवाई में 20 लाख रुपये से ज्यादा का सामान जब्त किए जाने और सात लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई। ये मामले बताते हैं कि पैकेट पर लिखी तारीख को देखकर ही संतुष्ट होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पैकेजिंग और उत्पाद की स्थिति भी जांचना जरूरी है।
अब सवाल है कि खाद्य पदार्थों पर लिखी अलग-अलग तारीखों का मतलब क्या होता है? खाद्य उत्पादों की लेबलिंग से जुड़े नियमों के तहत निर्माण या पैकिंग की तारीख, एक्सपायरी या उपयोग की अंतिम तारीख और ‘बेस्ट बिफोर’ जैसी जानकारी उपभोक्ताओं को दी जाती है। अलग-अलग उत्पादों की शेल्फ लाइफ के आधार पर तारीख लिखने का तरीका भी अलग हो सकता है।
‘एक्सपायरी’ या ‘यूज बाय’ तारीख को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि यह उस समयसीमा से जुड़ी होती है जिसके बाद उत्पाद का सेवन सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है। वहीं ‘बेस्ट बिफोर’ आम तौर पर उत्पाद की गुणवत्ता से जुड़ा संकेत होता है। यानी दोनों शब्दों को एक जैसा समझना सही नहीं है।
एक्सपायर्ड खाना खाने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। खाद्य पदार्थ खराब होने पर उसमें हानिकारक बैक्टीरिया या अन्य सूक्ष्मजीव बढ़ सकते हैं। इसके कारण फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर नमी वाले खाद्य पदार्थों में गलत तापमान या खराब स्टोरेज की स्थिति में सूक्ष्मजीव तेजी से बढ़ सकते हैं।
यह भी समझना जरूरी है कि सिर्फ खाना गर्म कर लेने से हर तरह का खतरा खत्म नहीं होता। कुछ परिस्थितियों में गर्म करने से कुछ सूक्ष्मजीव कम हो सकते हैं, लेकिन सभी जोखिम खत्म होने की गारंटी नहीं होती। इसलिए संदिग्ध या एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ को गर्म करके खाने के बजाय उसे फेंक देना ही सुरक्षित विकल्प है।
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए दूषित या खराब भोजन का जोखिम ज्यादा गंभीर हो सकता है। इसलिए ऐसे लोगों के लिए खाद्य पदार्थ खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।
ग्राहकों को पैकेट खरीदने से पहले निर्माण तारीख और एक्सपायरी या ‘यूज बाय’ तारीख जरूर देखनी चाहिए। पैकेट फटा, खुला, सूजा हुआ या किसी तरह से क्षतिग्रस्त दिखाई दे तो उसे खरीदने से बचें। साथ ही पैकेट पर लिखी भंडारण संबंधी शर्तों का भी पालन करें। केवल महक, रंग या स्वाद सामान्य होने के आधार पर किसी संदिग्ध खाद्य पदार्थ को सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
खासकर दूध और डेयरी उत्पाद, मांस, मछली और दूसरे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। अगर किसी उत्पाद की तारीख, पैकेजिंग या सुरक्षा को लेकर जरा भी संदेह हो, तो उसे खाने का जोखिम नहीं लेना चाहिए। आखिरकार, कुछ रुपये बचाने या सामान बर्बाद होने से बचाने से कहीं ज्यादा जरूरी आपकी और आपके परिवार की सेहत है।

