श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार आते ही घरों में कान्हा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस बार जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। जन्माष्टमी के मौके पर लोग घर के मंदिर को खूबसूरत तरीके से सजाने के लिए बाजार से महंगे डेकोरेशन आइटम खरीदते हैं, लेकिन अगर आप कम खर्च में मंदिर को आकर्षक बनाना चाहती हैं तो घर में रखी पुरानी साड़ियों का इस्तेमाल कर सकती हैं।
पुरानी सिल्क, जॉर्जेट या चमकीले रंगों वाली साड़ियों से मंदिर के लिए खूबसूरत पर्दे, बैकड्रॉप, झालर और तोरण तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए आपको बहुत ज्यादा सामान की जरूरत भी नहीं होगी। साड़ी के साथ गोटा-पट्टी, सेफ्टी पिन, सुई-धागा और डबल साइड टेप जैसी चीजों की मदद से मंदिर को बेहद सुंदर लुक दिया जा सकता है।
सबसे आसान तरीका है साड़ी को मंदिर के पीछे बैकड्रॉप की तरह इस्तेमाल करना। इसके लिए पीले, गुलाबी, नारंगी या किसी चमकीले रंग की पुरानी साड़ी चुनें। साड़ी को मंदिर के पीछे वाली दीवार पर प्लेट्स बनाकर अच्छी तरह फैला दें। इसके बाद साड़ी के ऊपरी हिस्से पर गोटा-पट्टी लगाएं। चाहें तो गोटे की मदद से बीच में मंडप या किसी सुंदर डिजाइन का आकार भी बनाया जा सकता है। इससे मंदिर का पिछला हिस्सा एक खूबसूरत झांकी जैसा नजर आने लगेगा।
मंदिर की सजावट में तोरण और झालर का भी खास महत्व होता है। पुरानी साड़ी के बचे हुए बॉर्डर को काटकर अलग करें और उस पर गोटा-किनारी या दूसरी सजावटी लेस सिल दें। इसके बाद इसे मंदिर के मुख्य द्वार, चौकी या आसपास लगाया जा सकता है। साड़ी के बचे हुए कपड़े से छोटे-छोटे फूल बनाकर उन्हें धागे में पिरोकर लंबी झालर तैयार की जा सकती है। इसे मंदिर की छत या आसपास लटकाने से सजावट और भी आकर्षक लगेगी।
अगर आप लड्डू गोपाल की चौकी को खास लुक देना चाहती हैं तो इसके लिए लाल, पीले या किसी चमकीले रंग की पुरानी साड़ी का कपड़ा इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे पहले कपड़े को चौकी पर अच्छी तरह लपेटें और किनारों को सुरक्षित कर दें। इसके बाद चौकी के चारों तरफ चौड़ी गोटा-पट्टी लगाएं। सजावट को और खूबसूरत बनाने के लिए सितारे, कुंदन या छोटे सजावटी मोती भी लगाए जा सकते हैं।
चौकी के कपड़े पर गोटे या कुंदन की मदद से छोटे फूल, मोर या स्वास्तिक जैसी पारंपरिक आकृतियां बनाई जा सकती हैं। इसके बाद इसी सजी हुई चौकी पर बाल गोपाल को विराजमान करें। आसपास छोटे फूल, मोरपंख, बांसुरी और पारंपरिक सजावटी सामान रखकर जन्माष्टमी की पूरी थीम तैयार की जा सकती है।
इस तरह घर में पड़ी पुरानी साड़ियों को फेंकने के बजाय उनका दोबारा इस्तेमाल करके जन्माष्टमी के लिए सुंदर मंदिर सजाया जा सकता है। यह तरीका बजट-फ्रेंडली होने के साथ-साथ रचनात्मक और पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर है। थोड़ी सी मेहनत और सही रंगों के कॉम्बिनेशन से आपका छोटा सा घर का मंदिर भी जन्माष्टमी पर बेहद आकर्षक नजर आ सकता है।


