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भारत-UAE की 100 बिलियन डॉलर की यारी! बढ़ती दोस्ती से चीन की टेंशन बढ़ी, अब खाड़ी में बदलेगा खेल

भारत और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की दोस्ती अब सिर्फ कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं रह गई है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। इसी साझेदारी का सबसे बड़ा संकेत है 100 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य, जिसने भारत और UAE के रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

एक तरफ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत है, तो दूसरी तरफ खाड़ी क्षेत्र का प्रमुख व्यापारिक और तकनीकी केंद्र UAE है। दोनों देशों की आर्थिक जरूरतें एक-दूसरे के लिए काफी हद तक पूरक हैं। यही वजह है कि भारत और UAE के रिश्ते अब सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं।

100 बिलियन डॉलर का व्यापार सिर्फ एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है। यह दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और मजबूत होते कारोबारी रिश्तों का संकेत है। भारत के लिए UAE पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण साझेदार है, जबकि UAE के लिए भारत दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है।

इस पूरी कहानी में सबसे अहम मोड़ साल 2022 में आया, जब भारत और UAE के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट यानी CEPA लागू हुआ। इस समझौते ने दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई बाधाओं को कम किया और कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा किए।

CEPA के बाद भारत और UAE के बीच कई क्षेत्रों में व्यापार और निवेश के अवसर बढ़े। पेट्रोलियम उत्पादों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रत्न एवं आभूषण, खाद्य उत्पादों और कई दूसरे क्षेत्रों में दोनों देशों के कारोबारी संबंध मजबूत हुए।

भारत के लिए UAE की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि वह सिर्फ एक व्यापारिक साझेदार नहीं है। UAE में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय रहता है, जो दोनों देशों के बीच सामाजिक और आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करता है। भारत से UAE जाने वाला निवेश और UAE से भारत आने वाला निवेश भी दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरे संबंधों को दिखाता है।

अब इस बढ़ती दोस्ती का असर सिर्फ भारत और UAE तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने में भी UAE महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत की Act East Policy के साथ पश्चिम एशिया में उसकी बढ़ती सक्रियता और UAE की वैश्विक व्यापार रणनीति कई जगह एक-दूसरे से जुड़ती हैं।

यही वजह है कि भारत-UAE साझेदारी को चीन भी नजरअंदाज नहीं कर सकता। चीन लंबे समय से खाड़ी देशों के साथ व्यापार और रणनीतिक संबंध बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत और UAE के बीच तेजी से बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी क्षेत्र में एक अलग शक्ति संतुलन तैयार कर सकती है।

हालांकि इसे सीधे तौर पर भारत बनाम चीन की प्रतिस्पर्धा कहना सही नहीं होगा। UAE एक ऐसी रणनीति पर काम करता है जिसमें वह अलग-अलग बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत रखता है। फिर भी भारत और UAE की बढ़ती नजदीकी चीन के लिए निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण भू-आर्थिक घटनाक्रम है।

भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा यह है कि UAE के साथ मजबूत रिश्तों के जरिए पश्चिम एशिया के बाजारों तक पहुंच बढ़ती है। वहीं UAE भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार और तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था में निवेश के अवसर तलाश सकता है।

अब आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्ते व्यापार से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी नई ऊंचाइयां छू सकते हैं।

इसलिए भारत-UAE की 100 बिलियन डॉलर की साझेदारी को सिर्फ व्यापार का आंकड़ा समझना बड़ी भूल होगी। यह बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका और पश्चिम एशिया में उसकी मजबूत होती रणनीतिक पहुंच का भी संकेत है।

अब देखना होगा कि भारत और UAE इस आर्थिक साझेदारी को आने वाले वर्षों में किस मुकाम तक ले जाते हैं और क्या यह दोस्ती पश्चिम एशिया में भारत की रणनीतिक ताकत को और मजबूत करने में कामयाब होती है।

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