रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शनिवार को एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर तीन दिनों के लिए हमले रोकने का आदेश दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर रूस और यूक्रेन की यात्रा पर हैं और युद्ध को खत्म कराने की कोशिशों को फिर से आगे बढ़ाने की कवायद चल रही है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक, पुतिन ने शनिवार आधी रात से कीव पर तीन दिनों तक कोई हमला नहीं करने का आदेश दिया है। यह अस्थायी रोक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की प्रस्तावित कीव यात्रा की तैयारियों से जुड़ी बताई जा रही है। इस दौरान अमेरिकी विशेष दूत रूस और यूक्रेन के बीच शांति की संभावनाओं पर बातचीत करेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में कीव का दौरा किया था, जहां उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात की। जयशंकर ने साफ कहा कि भारत रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए हर संभव मदद करने को तैयार है।
जयशंकर ने कीव में एक बार फिर भारत का पुराना और स्पष्ट रुख दोहराया कि यह युद्ध का दौर नहीं है और किसी भी समस्या का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता। उन्होंने कहा कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही तलाशना होगा।
भारत के विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया जब रूस और यूक्रेन के बीच हवाई हमले लगातार जारी थे। जयशंकर की कीव यात्रा के दौरान भी रूसी ड्रोन हमले की खबर सामने आई थी। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा यूक्रेनी वायुसेना की कार्रवाई के कारण सुनिश्चित हो सकी।
अब पुतिन की ओर से कीव पर तीन दिनों के लिए हमले रोकने का फैसला इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना रहा है। हालांकि इसे पूर्ण युद्धविराम नहीं माना जा रहा है। यह रोक फिलहाल सिर्फ कीव पर रूसी हमलों से जुड़ी है और युद्ध के दूसरे मोर्चों पर सैन्य गतिविधियां जारी रह सकती हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर भी काफी उम्मीदें हैं। स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर रूस पहुंच चुके हैं और पुतिन से उनकी मुलाकात होनी है। इसके बाद अमेरिकी प्रतिनिधियों के यूक्रेन जाने की योजना है। माना जा रहा है कि बातचीत में युद्ध को रोकने और शांति समझौते की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान अपनी तरफ से हवाई हमले रोकने की बात कही है। ऐसे में अगर दोनों पक्ष कुछ समय के लिए हमले रोकते हैं तो बातचीत के लिए एक अपेक्षाकृत शांत माहौल तैयार हो सकता है।
हालांकि जमीन पर स्थिति अभी भी बेहद गंभीर बनी हुई है। रूस और यूक्रेन दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ ड्रोन और मिसाइल हमलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल के दिनों में दोनों तरफ से हवाई हमलों में तेजी देखी गई है और कई इलाकों में आम नागरिक भी प्रभावित हुए हैं।
जेलेंस्की ने हाल ही में कीव और बोरिस्पिल एयरपोर्ट पर रूसी हमलों को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की संभावित यात्रा से जोड़ते हुए कहा था कि ये हमले उस तैयारी की प्रतिक्रिया हो सकते हैं जिसमें अमेरिकी पक्ष विमान से यूक्रेन पहुंचने की संभावना पर विचार कर रहा था।
वहीं रूस की ओर से अब तीन दिन की हमले रोकने की घोषणा ने बातचीत की संभावनाओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इससे स्थायी युद्धविराम या शांति समझौते की दिशा में कोई बड़ा कदम उठेगा।
भारत लगातार रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में रहने की बात कहता रहा है। जयशंकर ने भी स्पष्ट किया है कि भारत दोनों देशों के साथ बातचीत जारी रखे हुए है और अगर शांति स्थापित करने में भारत किसी भी तरह की मदद कर सकता है तो वह इसके लिए तैयार है।
भारत का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस और यूक्रेन दोनों के साथ भारत के अलग-अलग स्तर पर संबंध हैं। नई दिल्ली लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए संघर्ष खत्म करने की वकालत करती रही है।
अब सबकी नजर अमेरिका के विशेष दूतों और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच होने वाली बातचीत पर है। अगर इस बैठक में कोई ठोस रास्ता निकलता है तो यह युद्ध को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेदों को देखते हुए बातचीत आसान नहीं मानी जा रही।
फिलहाल पुतिन का तीन दिनों के लिए कीव पर हमले रोकने का आदेश और अमेरिका के विशेष दूतों की रूस-यूक्रेन यात्रा एक साथ हुई है। जयशंकर के शांति और कूटनीति के संदेश के बाद सामने आया यह घटनाक्रम निश्चित तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद अहम माना जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या तीन दिनों की यह अस्थायी रोक आगे चलकर लंबे युद्धविराम का रास्ता खोलेगी या फिर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की बातचीत खत्म होते ही रूस और यूक्रेन के बीच हमले दोबारा तेज हो जाएंगे। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर आज होने वाली अहम कूटनीतिक बातचीत और उसके नतीजों पर टिकी हुई है।


