टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंड रोवर यानी JLR में करीब 4,000 नौकरियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कंपनी कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों को स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना के बारे में जानकारी दे चुकी है। संभावित जॉब कट ऐसे समय में सामने आया है, जब JLR कमजोर बिक्री, बढ़ती लागत, अमेरिकी आयात शुल्क और पिछले साल हुए बड़े साइबर हमले के असर जैसी कई चुनौतियों से जूझ रही है।
मौजूदा जानकारी के मुताबिक कंपनी इस योजना की औपचारिक घोषणा सोमवार को कर सकती है। प्रस्ताव के तहत वेतन पाने वाले कर्मचारियों और मैनेजमेंट स्तर के लोगों को स्वेच्छा से कंपनी छोड़ने का विकल्प दिया जा सकता है। हालांकि करीब 4,000 कर्मचारियों की संभावित कमी की खबर सामने आई है, लेकिन JLR ने अभी इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ऐसे में वास्तविक संख्या कंपनी की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
JLR अगले दो वर्षों में करीब 1.7 अरब पाउंड की बचत करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी अपने कारोबार और संगठनात्मक ढांचे को भी सरल बनाना चाहती है, ताकि बदलते वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में लागत को नियंत्रित किया जा सके। कंपनी का लक्ष्य अपने कामकाज को इस स्तर पर लाने का है, जहां लाभ-हानि की बराबरी के लिए सालाना करीब तीन लाख वाहनों की बिक्री पर्याप्त हो सके।
ब्रिटेन में JLR के तीन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जहां करीब 34,000 लोग सीधे तौर पर काम करते हैं। इसके अलावा कंपनी की सप्लाई चेन से ब्रिटेन में लगभग 1.20 लाख अन्य रोजगार जुड़े हुए हैं। ऐसे में अगर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की संख्या कम होती है, तो इसका असर केवल JLR के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह सकता। सप्लायर कंपनियों, स्थानीय कारोबारों और ब्रिटेन के व्यापक ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
कंपनी की मुश्किलों में पिछले साल हुआ साइबर हमला भी बड़ी वजह रहा है। हमले के बाद JLR का उत्पादन कई सप्ताह तक प्रभावित हुआ था। इसके चलते उत्पादन में करीब 27 प्रतिशत की गिरावट आई और इस व्यवधान से कंपनी को लगभग 1.9 अरब पाउंड का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया। कंपनी अभी भी उस झटके से पूरी तरह उबरने की कोशिश कर रही है और इसी बीच लागत कम करने की योजना ने कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिकी बाजार भी JLR के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। अमेरिका की ओर से ब्रिटेन से आने वाली कारों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने का असर कंपनी के कारोबार पर पड़ा है। उत्तरी अमेरिका JLR की वैश्विक बिक्री में करीब 29 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। ऐसे में इस अहम बाजार में शुल्क बढ़ने से कंपनी की लागत, कीमत और मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है।
दूसरी तरफ वैश्विक ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में चीनी वाहन कंपनियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने भी पारंपरिक वाहन निर्माताओं के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ता बाजार, कमजोर मांग, महंगी ऊर्जा और उत्पादन लागत जैसे मुद्दे कंपनियों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। ऐसे माहौल में JLR को अपने प्रीमियम ब्रांड्स की स्थिति मजबूत करने के साथ लागत पर भी नियंत्रण रखना पड़ रहा है।
जून 2026 में समाप्त तिमाही में JLR के राजस्व में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कमजोर बिक्री और बढ़ते खर्च के बीच कंपनी के मुख्य कार्यकारी पीबी बालाजी पर कारोबार को अधिक कुशल बनाने और लागत घटाने का दबाव बढ़ा है। संभावित जॉब कट इसी व्यापक लागत बचत रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
श्रमिक संगठन यूनाइट की महासचिव शेरोन ग्राहम ने संभावित नौकरी कटौती पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि उद्योग की मुश्किलों का बार-बार बोझ कर्मचारियों पर डालना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने लंबे समय से कम निवेश, महंगी औद्योगिक बिजली और शून्य उत्सर्जन वाहनों से जुड़े नियमों को भी ब्रिटेन के ऑटो उद्योग की चुनौतियों में शामिल बताया है।
ब्रिटेन सरकार ने भी कर्मचारियों, उनके परिवारों और प्रभावित समुदायों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। सरकार की ओर से वाहन उद्योग की बिजली लागत कम करने, शून्य उत्सर्जन वाहन निर्माण के लिए पूंजी और अनुसंधान सहायता देने तथा इलेक्ट्रिक कारों की खरीद को बढ़ावा देने जैसी योजनाओं का उल्लेख किया गया है।
अब नजर JLR की औपचारिक घोषणा पर है। अगर करीब 4,000 नौकरियों में कटौती की योजना आगे बढ़ती है, तो यह ब्रिटेन के ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव होगा। कंपनी के सामने एक तरफ लागत कम करने और मुनाफे को बचाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ रोजगार, उत्पादन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।


