जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में साइबर सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए VPN यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क के इस्तेमाल पर दो महीने के लिए रोक लगा दी गई है। जिला प्रशासन ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब इंटरनेट के जरिए प्रतिबंधित डिजिटल सामग्री और वेबसाइटों तक पहुंच बनाने के लिए VPN के कथित दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई गई है।
डोडा के जिला मजिस्ट्रेट कृष्ण लाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। पांच सितंबर को जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि कुछ लोग और समूह कथित तौर पर VPN का इस्तेमाल करके साइबर प्रतिबंधों को दरकिनार कर रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक, इसके जरिए प्रतिबंधित एप्लिकेशन, वेबसाइट और डिजिटल सामग्री तक पहुंच बनाई जा रही है।
जिला प्रशासन ने आशंका जताई है कि VPN के जरिए किए जा रहे इस तरह के कथित दुरुपयोग का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल अशांति फैलाने, भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने और कानून-व्यवस्था के लिए परेशानी पैदा करने वाली गतिविधियों में किया जा सकता है।
जिला मजिस्ट्रेट कृष्ण लाल के अनुसार, VPN सेवाओं के संभावित दुरुपयोग से सार्वजनिक शांति और राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने पैदा हो सकने वाले खतरे को देखते हुए यह कदम निवारक उपाय के तौर पर उठाया गया है। प्रशासन का कहना है कि प्रतिबंध का उद्देश्य किसी सामान्य इंटरनेट उपयोगकर्ता को परेशान करना नहीं, बल्कि साइबर माध्यम से होने वाली संभावित गैरकानूनी गतिविधियों को रोकना है।
यह प्रतिबंध केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। आदेश के मुताबिक डोडा जिले में काम कर रहे व्यक्ति, संस्थान, साइबर कैफे, कारोबारी इकाइयां और इंटरनेट सेवा प्रदाता भी इसके दायरे में आएंगे। यानी बिना अनुमति VPN सेवा का इस्तेमाल करने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि प्रशासन ने सरकारी और आधिकारिक कामकाज के लिए एक महत्वपूर्ण छूट भी रखी है। जिन मामलों में सरकार की ओर से आधिकारिक आदेश के माध्यम से VPN के इस्तेमाल की स्पष्ट अनुमति दी गई है, वहां यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। यानी अधिकृत सरकारी या अन्य स्वीकृत उपयोग को इस आदेश से बाहर रखा गया है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही डोडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई है। पुलिस और प्रशासन अब इस निर्देश के पालन को लेकर निगरानी रखेंगे।
VPN का इस्तेमाल आम तौर पर इंटरनेट कनेक्शन को एक अलग सर्वर के जरिए रूट करने और ऑनलाइन गतिविधियों में अतिरिक्त प्राइवेसी या सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जाता है। लेकिन प्रशासन का कहना है कि कुछ मामलों में इसका इस्तेमाल कानूनी साइबर प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा है। इसी कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए डोडा में अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है।
डोडा में दो महीने के लिए लगाया गया यह प्रतिबंध जम्मू-कश्मीर में साइबर सुरक्षा और डिजिटल गतिविधियों को लेकर प्रशासन की सख्ती को दिखाता है। खासकर ऐसे क्षेत्र में जहां सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मामलों को संवेदनशील माना जाता है, प्रशासन किसी भी संभावित खतरे को पहले ही रोकने के लिए निवारक कदम उठा रहा है।
फिलहाल यह आदेश दो महीने की अवधि के लिए लागू किया गया है। इस दौरान अगर कोई व्यक्ति या संस्था बिना आधिकारिक अनुमति VPN का इस्तेमाल करते हुए पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। अब देखना होगा कि इस प्रतिबंध के दौरान प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई किस तरह आगे बढ़ती है और दो महीने की अवधि पूरी होने के बाद इस आदेश को लेकर क्या फैसला लिया जाता है।


