Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

BRICS Summit में जिनपिंग के सामने मोदी के 3 बड़े मंत्र! कहा- मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए

नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने एक बार फिर भारत-चीन संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में सीमा विवाद और मतभेदों के बावजूद रिश्तों को आगे बढ़ाने पर जोर दिखाई दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ संदेश दिया कि भारत और चीन के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन्हें विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को स्थिर रखने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश है।

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान आपसी विश्वास और सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। उनका संदेश तीन अहम बिंदुओं के आसपास दिखाई दिया—दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना, आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए सहयोग बढ़ाना और द्विपक्षीय संबंधों को लंबे समय की रणनीतिक सोच के साथ आगे ले जाना। भारत की ओर से यह संकेत दिया गया कि प्रतिस्पर्धा और मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग के रास्ते बंद नहीं होने चाहिए।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी भारत और चीन के संबंधों को रणनीतिक नजरिए से देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपने द्विपक्षीय संबंधों के लंबे समय के विकास को ध्यान में रखना चाहिए। शी ने इस बात पर भी जोर दिया कि चीन और भारत भले ही एक-दूसरे से अलग हों, लेकिन दोनों देश साझा विकास हासिल करने के लिए एक-दूसरे का समर्थन और मदद कर सकते हैं।

शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात पर खुशी जाहिर करते हुए भारत में आयोजित BRICS Summit की सफलता के लिए उन्हें बधाई भी दी। चीनी राष्ट्रपति ने बताया कि 12 साल में यह उनकी नई दिल्ली की दूसरी यात्रा है। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच पिछले वर्षों में हुई मुलाकातों का भी जिक्र किया और कहा कि इस दौरान दोनों नेता 20 से ज्यादा बार मिल चुके हैं। उनके मुताबिक इन मुलाकातों के दौरान कई महत्वपूर्ण सहमतियां बनी हैं।

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद की वजह से काफी तनाव देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर तनाव ने द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की यह बातचीत सिर्फ एक सामान्य बैठक नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य दिशा में ले जाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की ओर से मतभेदों को विवाद में न बदलने का संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और चीन दोनों ही दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों देश BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर एक साथ काम करते हैं। वैश्विक व्यापार, ऊर्जा, विकास और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के हित कई जगह एक-दूसरे के करीब भी दिखाई देते हैं।

वहीं चीन की ओर से भी भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक नजरिए से देखने की बात ऐसे समय पर आई है जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच भारत और चीन दोनों ही अपनी-अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को मजबूत करने में जुटे हैं।

इस मुलाकात का एक बड़ा संदेश यह भी है कि भारत और चीन अपने मतभेदों के बावजूद बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच सभी विवाद खत्म हो गए हैं। सीमा से जुड़े मुद्दे, व्यापार असंतुलन और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे कई सवाल अभी भी मौजूद हैं। लेकिन शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर संवाद जारी रहना तनाव को नियंत्रित करने के लिहाज से अहम माना जाता है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि मोदी और जिनपिंग की इस बातचीत के बाद भारत-चीन संबंधों में जमीन पर कितना बदलाव दिखाई देता है। क्या दोनों देश सीमा विवाद को और आगे बढ़ने से रोक पाएंगे? क्या व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी? और क्या दोनों देशों के बीच भरोसा फिर से मजबूत हो पाएगा? फिलहाल BRICS Summit में हुई इस मुलाकात ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि भारत मतभेदों के बावजूद संवाद और अपने राष्ट्रीय हितों के साथ रिश्तों को आगे बढ़ाने की नीति पर कायम है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles