प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद भारत की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने चीन को लेकर मोदी सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चार गंभीर सवाल पूछे हैं।
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की थी। शी जिनपिंग भारत की मेजबानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे थे। दोनों नेताओं की बैठक के बाद भारत और चीन के संबंधों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
इसी बीच कांग्रेस ने चीन के साथ भारत के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। पार्टी का आरोप है कि मोदी सरकार ने चीन पर भारत की आर्थिक निर्भरता को खतरनाक स्तर तक बढ़ने दिया है। कांग्रेस ने सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाते हुए दावा किया कि चीन के मामले में सरकार ने सोच-समझकर ऐसी स्थिति पैदा की है, जिसे पार्टी ने ‘घुटने टेकने’ जैसी स्थिति करार दिया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री मोदी से चार सवाल पूछे। उन्होंने चीन के साथ भारत के मौजूदा संबंधों और सरकार की नीतियों पर स्पष्टीकरण मांगा। कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों का केंद्र चीन के साथ व्यापार, आर्थिक निर्भरता और दोनों देशों के बीच संबंधों से जुड़े मुद्दों पर रहा।
कांग्रेस का कहना है कि एक तरफ सरकार चीन के साथ रणनीतिक संबंधों को लेकर बातचीत करती है, वहीं दूसरी तरफ भारत का चीन से आयात लगातार एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। पार्टी का सवाल है कि चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए सरकार की वास्तविक रणनीति क्या है और इस दिशा में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी से यह भी सवाल किया कि चीन के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों में असंतुलन को दूर करने के लिए सरकार क्या कर रही है। कांग्रेस लंबे समय से भारत के चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर सरकार पर निशाना साधती रही है। पार्टी का तर्क है कि अगर भारत चीन से बड़ी मात्रा में आयात करता है, तो इससे घरेलू उद्योग और रणनीतिक क्षेत्रों पर भी असर पड़ सकता है।
इसके अलावा कांग्रेस ने चीन के साथ भारत के व्यापक संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच संतुलन किस तरह बनाया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि चीन के साथ किसी भी तरह की बातचीत में भारत के राष्ट्रीय हित और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन के रिश्तों में कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिल रहे हैं। दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दे लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं। इसके बावजूद हाल के समय में दोनों पक्षों की ओर से संबंधों को सामान्य बनाने और संवाद बनाए रखने के प्रयास भी दिखाई दिए हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। वहीं कांग्रेस इस मुलाकात के बाद सरकार से चीन नीति को लेकर जवाब मांग रही है। पार्टी का कहना है कि सिर्फ उच्चस्तरीय मुलाकातों से रिश्तों का आकलन नहीं किया जा सकता, बल्कि आर्थिक और सुरक्षा नीतियों के स्तर पर भी सरकार की दिशा स्पष्ट होनी चाहिए।
जयराम रमेश के सवालों के बाद अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार या बीजेपी की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर क्या जवाब दिया जाता है। सरकार की ओर से चीन के साथ संबंधों को लेकर अपनी रणनीति और राष्ट्रीय हितों को लेकर पहले भी कई बार अपना पक्ष रखा जाता रहा है।
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक के बाद कांग्रेस का हमला राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है। एक तरफ सरकार भारत-चीन संवाद और रणनीतिक संबंधों को लेकर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है, वहीं कांग्रेस चीन के प्रति आर्थिक निर्भरता और सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है। अब देखना होगा कि जयराम रमेश द्वारा उठाए गए चार सवालों पर केंद्र सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।


