भारतीय लग्जरी कार बाजार में Mercedes-Benz और BMW के बीच मुकाबला लगातार कड़ा होता जा रहा है। एक समय दोनों कंपनियों के बीच बिक्री का अंतर काफी बड़ा हुआ करता था, लेकिन अब BMW तेजी से Mercedes-Benz के करीब पहुंच रही है। साल 2025 में दोनों कंपनियों की बिक्री का अंतर घटकर महज 1,736 कारों का रह गया। वहीं 2026 की पहली छमाही के वाहन पंजीकरण आंकड़ों में BMW ने Mercedes-Benz को पीछे भी छोड़ दिया है। इस बदलती तस्वीर के बीच Mercedes-Benz India के प्रमुख Santosh Iyer ने कंपनी की रणनीति साफ कर दी है।
हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में Santosh Iyer ने कहा कि Mercedes-Benz केवल नंबर-1 बने रहने के लिए अपनी कारों की कीमतें कम करने या भारी छूट देने की रणनीति नहीं अपनाएगी। उनके मुताबिक नंबर एक, नंबर दो या नंबर तीन की चर्चा मुख्य रूप से मीडिया और बाजार की ओर से होती है, जबकि कंपनी का ध्यान अपने उत्पादों की गुणवत्ता और ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने पर है।
Mercedes-Benz साल 2015 से भारत के लग्जरी कार बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। 2015 में कंपनी ने 13,502 कारें बेची थीं, जबकि BMW India की बिक्री 6,550 इकाइयों पर रही थी। यानी उस समय Mercedes और BMW के बीच 6,952 कारों का बड़ा अंतर था। 2018 तक भी यह अंतर 5,000 से ज्यादा रहा था और 2019 में Mercedes-Benz करीब 4,786 कारों की बढ़त के साथ आगे थी।
कोरोना महामारी के बाद भी Mercedes-Benz ने लंबे समय तक BMW पर अपनी बढ़त कायम रखी। साल 2022 में दोनों कंपनियों के बीच बिक्री का अंतर 4,554 कारों का था। 2023 में यह अंतर 4,105 और 2024 में 4,553 कार रहा। लेकिन 2025 में BMW ने जोरदार वापसी की। Mercedes-Benz की बिक्री मामूली गिरावट के साथ 19,007 कारों पर रही, जबकि BMW ने 17,271 कारें बेच दीं। इसके साथ ही दोनों कंपनियों के बीच का अंतर घटकर सिर्फ 1,736 कारों का रह गया।
BMW भारत में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए नए मॉडल, SUV, इलेक्ट्रिक कारों और लॉन्ग-व्हीलबेस मॉडलों पर लगातार जोर दे रही है। X1 लॉन्ग-व्हीलबेस वर्जन और भारत में तैयार की जाने वाली i5 लॉन्ग-व्हीलबेस जैसी कारों के अलावा नई 7 Series और i7 ने भी कंपनी के प्रीमियम पोर्टफोलियो को मजबूत किया है। यही वजह है कि भारतीय बाजार में Mercedes-Benz के सामने BMW की चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है।
वैश्विक स्तर पर भी BMW पहले ही Mercedes-Benz को पीछे छोड़ चुकी है। 2021 में BMW ने दुनिया भर में प्रीमियम कारों की बिक्री में Mercedes-Benz को पछाड़ दिया था और इसके बाद से वह बढ़त बनाए हुए है। हालांकि भारत में Mercedes-Benz की सालाना बिक्री अब तक BMW से आगे रही है। ऐसे में 2026 में दोनों कंपनियों के बीच मुकाबला और दिलचस्प होने की उम्मीद है।
लेकिन Mercedes-Benz India के लिए सिर्फ ज्यादा कारें बेचना प्राथमिकता नहीं है। Santosh Iyer के मुताबिक भारी छूट देकर बिक्री बढ़ाना आसान हो सकता है, लेकिन इससे पहले कार खरीद चुके ग्राहकों को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही इस्तेमाल की गई कारों की रीसेल वैल्यू पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए कंपनी कीमतों की स्थिरता और अपने खुदरा बिक्री मॉडल में छूट को नियंत्रित रखने पर जोर दे रही है।
Santosh Iyer का कहना है कि किसी लग्जरी कार कंपनी की स्थिति को केवल उसकी बिक्री संख्या से नहीं आंका जा सकता। Mercedes-Benz का वाहन मिश्रण और ग्राहक वर्ग ऐसा है कि कुल आय के मामले में कंपनी BMW से काफी आगे है। ऐसे में कंपनी के लिए सिर्फ नंबर-1 की रैंकिंग से ज्यादा महत्वपूर्ण बेहतर उत्पाद, ग्राहक अनुभव, कीमतों की स्थिरता और कारों की रीसेल वैल्यू बनाए रखना है। अब देखना होगा कि BMW की बढ़ती चुनौती के बीच Mercedes-Benz अपनी बादशाहत कितने समय तक कायम रख पाती है।


