मोबाइल फोन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए आने वाले समय में बड़ी राहत की खबर आ सकती है। मोबाइल फोन उद्योग ने सरकार से स्मार्टफोन पर लगने वाले GST को 18 प्रतिशत से घटाकर सिर्फ 5 प्रतिशत करने की मांग की है। उद्योग का कहना है कि अगर सरकार यह फैसला लेती है तो बढ़ती कीमतों से परेशान ग्राहकों को राहत मिल सकती है और देश में मोबाइल फोन की घरेलू मांग को भी बढ़ावा मिल सकता है।
भारतीय सेल्युलर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स संघ ने इस मामले में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजकर अपनी मांग रखी है। संगठन ने अपील की है कि आगामी GST परिषद की बैठक में मोबाइल फोन पर टैक्स की दर कम करने का प्रस्ताव रखा जाए और सरकार इसका समर्थन करे।
भारतीय सेल्युलर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स संघ में Apple, Xiaomi, Oppo, Vivo, Dixon, Bhagwati और Lava जैसी भारतीय और विदेशी कंपनियां शामिल हैं। उद्योग का कहना है कि मौजूदा 18 प्रतिशत GST खासकर कम कीमत वाले मोबाइल खरीदने वाले ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है। इसके साथ ही मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले जरूरी कलपुर्जों पर टैक्स को भी तर्कसंगत बनाने की मांग की गई है।
मोबाइल फोन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे उद्योग ने स्मृति चिप यानी Memory Chip की बढ़ती कीमतों को भी एक बड़ा कारण बताया है। संगठन के मुताबिक सितंबर 2025 से मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाली इन चिप्स की कीमत करीब चार गुना तक बढ़ चुकी है। Artificial Intelligence से जुड़े डेटा सेंटर में इन चिप्स की मांग बढ़ने के कारण वैश्विक स्तर पर इनकी उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है।
इस बढ़ी हुई लागत का असर भारत में बिकने वाले मोबाइल फोन पर भी पड़ा है। उद्योग संगठन के अनुसार पिछले एक साल में शुरुआती श्रेणी के मोबाइल फोन की कीमतों में अलग-अलग कंपनियों के हिसाब से करीब 35 से 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर उन ग्राहकों पर पड़ा है जो कम बजट में स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं।
10 हजार रुपये से कम कीमत वाले मोबाइल फोन की उपलब्धता भी तेजी से कम हुई है। उद्योग के अनुसार इस कीमत वाली श्रेणी का बाजार में हिस्सा अब 5 प्रतिशत से भी कम रह गया है। यानी कम आय वाले ग्राहकों के लिए किफायती स्मार्टफोन के विकल्प लगातार सीमित होते जा रहे हैं।
उद्योग का तर्क है कि जब मोबाइल फोन की मूल कीमत बढ़ती है तो उसके ऊपर 18 प्रतिशत GST लगने से अंतिम कीमत और ज्यादा बढ़ जाती है। अगर किसी फोन की टैक्स से पहले कीमत में एक रुपये की बढ़ोतरी होती है तो उस पर 18 पैसे अतिरिक्त GST भी जुड़ जाता है। ऐसे में टैक्स दर कम होने पर कीमतों का दबाव कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
उद्योग को उम्मीद है कि अगर GST को 5 प्रतिशत किया जाता है तो इसका सबसे ज्यादा फायदा पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों, ग्रामीण परिवारों और कम आय वाले लोगों को मिल सकता है। इसके अलावा जिन लोगों ने कीमतों की वजह से अपना पुराना फोन बदलना टाल दिया है, वे भी नया स्मार्टफोन खरीदने का फैसला कर सकते हैं।
इसका असर डिजिटल सेवाओं पर भी पड़ सकता है। अगर ज्यादा लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने लगते हैं तो मोबाइल इंटरनेट, डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन शिक्षा, ई-कॉमर्स और दूसरी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल भी बढ़ सकता है। इससे मोबाइल फोन के साथ-साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
गौर करने वाली बात यह है कि GST लागू होने के समय जुलाई 2017 में मोबाइल फोन पर 12 प्रतिशत टैक्स लगाया गया था। बाद में अप्रैल 2020 में इसे बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया। अब उद्योग संगठन इसे वापस घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग कर रहा है। संगठन का कहना है कि GST से पहले मोबाइल फोन पर प्रभावी टैक्स का बोझ करीब 6 से 7 प्रतिशत के आसपास था, इसलिए 5 प्रतिशत की दर उस व्यवस्था के ज्यादा करीब होगी।
भारत में मोबाइल फोन निर्माण ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तार किया है। उद्योग के अनुसार देश में मोबाइल फोन का उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के करीब 18,900 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में मोबाइल फोन का निर्यात भी 1,566 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.60 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
भारत अब मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। लेकिन उद्योग का कहना है कि उत्पादन और निर्यात में तेजी के बावजूद घरेलू बाजार में मांग उतनी मजबूत नहीं है। बढ़ती कीमतों और लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति के कारण ग्राहक अपने पुराने स्मार्टफोन को ज्यादा समय तक चला रहे हैं।
ऐसे में उद्योग को उम्मीद है कि GST में कटौती से घरेलू बाजार में बिक्री बढ़ सकती है। ज्यादा बिक्री होने पर कंपनियां उत्पादन, कलपुर्जा निर्माण, वितरण और बिक्री के बाद की सेवाओं में निवेश बढ़ा सकती हैं। इससे मोबाइल फोन से जुड़े पूरे इकोसिस्टम को फायदा मिल सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार मोबाइल फोन उद्योग की इस मांग पर क्या फैसला लेती है। अगर GST 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाता है तो ग्राहकों को मोबाइल फोन की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि अंतिम कीमत कितनी कम होगी, यह सिर्फ GST पर निर्भर नहीं करेगी, क्योंकि मोबाइल की लागत, चिप की कीमत, कंपनी की रणनीति और दूसरे खर्च भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल मोबाइल फोन उद्योग की नजर आगामी GST परिषद की बैठक पर है। अगर सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करती है, तो इसका असर करोड़ों मोबाइल ग्राहकों पर पड़ सकता है। ऐसे समय में जब स्मार्टफोन आम लोगों की जरूरत का अहम हिस्सा बन चुका है, GST में कटौती का फैसला ग्राहकों के साथ-साथ देश के घरेलू मोबाइल बाजार के लिए भी बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।


