आज के डिजिटल दौर में यूपीआई ने पैसे भेजने और भुगतान करने का तरीका काफी आसान बना दिया है। छोटी खरीदारी से लेकर बिजली, मोबाइल और दूसरे बिलों के भुगतान तक लोग रोजाना यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं। कई लोग सुविधा के हिसाब से अलग-अलग ऐप जैसे फोनपे, गूगल पे और पेटीएम का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में महीने भर में किए गए सभी यूपीआई लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड एक जगह देखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
अगर आप अलग-अलग यूपीआई ऐप से किए गए भुगतान का हिसाब एक जगह देखना चाहते हैं, तो इसके लिए एनपीसीआई से जुड़ी सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है। शुरुआत करने के लिए सबसे पहले अपने मोबाइल में पेटीएम ऐप खोलें। इसके बाद प्रोफाइल फोटो या प्रोफाइल आइकन पर टैप करें। अब यहां आपको यूपीआई और पेमेंट सेटिंग्स से जुड़ा विकल्प दिखाई देगा। इस विकल्प पर टैप करने के बाद स्क्रीन को नीचे की ओर स्क्रॉल करें।
नीचे जाने पर आपको यूपीआई हेल्प का विकल्प दिखाई दे सकता है। इस पर टैप करने के बाद आपको संबंधित एनपीसीआई पेज पर ले जाया जा सकता है। यहां यूपीआई से जुड़े लेनदेन की जानकारी देखने के लिए उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रखें कि ऐप के संस्करण और समय के साथ विकल्पों के नाम या उनकी जगह बदल सकती है।
इस सुविधा का फायदा खास तौर पर उन लोगों को हो सकता है जो एक से ज्यादा यूपीआई ऐप इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपने किसी महीने कुछ भुगतान पेटीएम से किए हैं, कुछ फोनपे से और कुछ गूगल पे से, तो हर ऐप की हिस्ट्री अलग-अलग देखने के बजाय यूपीआई से जुड़े रिकॉर्ड को एक जगह समझना आसान हो सकता है।
हालांकि, बैंक खाते का आधिकारिक लेनदेन विवरण सबसे विश्वसनीय रिकॉर्ड माना जाता है। किसी भी यूपीआई भुगतान को लेकर संदेह होने पर अपने बैंक खाते की स्टेटमेंट और संबंधित ऐप की हिस्ट्री से जानकारी का मिलान जरूर करें। साथ ही किसी अनजान वेबसाइट या लिंक पर अपना यूपीआई पिन, ओटीपी, कार्ड विवरण या बैंकिंग जानकारी दर्ज न करें।
अगर आपका उद्देश्य केवल महीने भर के खर्च का हिसाब रखना है, तो हर भुगतान की तारीख, राशि और भुगतान का उद्देश्य भी नोट करते रहें। इससे महीने के अंत में यह समझना आसान होगा कि पैसा कहां और कितना खर्च हुआ। अलग-अलग यूपीआई ऐप इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह तरीका खास तौर पर उपयोगी हो सकता है।
यूपीआई की सुविधा ने डिजिटल भुगतान को काफी तेज और आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ लेनदेन का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना भी जरूरी है। इसलिए समय-समय पर अपनी यूपीआई हिस्ट्री और बैंक स्टेटमेंट जांचते रहें और किसी भी संदिग्ध लेनदेन की स्थिति में तुरंत अपने बैंक या संबंधित भुगतान सेवा से संपर्क करें।


