अमेरिका के टेक्सास में भगवान हनुमान की करीब 90 फीट ऊंची प्रतिमा को लेकर सोशल मीडिया पर की गई एक कथित धमकी के बाद विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला शुगरलैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर से जुड़ा है, जहां भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। मंदिर से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इस प्रतिमा को ‘स्टैचू ऑफ यूनियन’ नाम दिया गया है और अगस्त 2024 में इसका उद्घाटन किया गया था। इसे उत्तर अमेरिका में भगवान हनुमान की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में से एक बताया जाता है।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर जेसी ह्यूस नाम के एक व्यक्ति ने भगवान हनुमान की प्रतिमा की तस्वीर साझा करते हुए कथित तौर पर लिखा कि ‘जब हम जीतेंगे तो हम इसे गिरा देंगे।’ हालांकि पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वह किस जीत की बात कर रहे थे और न ही यह साफ है कि कथित बयान का संदर्भ क्या था। पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई।
इस पोस्ट को लेकर कुछ लोगों ने इसे धार्मिक असहिष्णुता से जोड़कर देखा, जबकि कुछ लोगों ने इसे अमेरिका में धार्मिक प्रतीकों, संस्कृति और पहचान को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा। इस बीच मामला केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा और भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय के बीच भी इसे लेकर प्रतिक्रिया सामने आने लगी।
अमेरिकी सेना के पूर्व कॉम्बैट वेटरन और हिंदू अमेरिकी रुचर बक्शी ने भी इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और अमेरिका की बहुलतावादी पहचान के संदर्भ में अपनी बात रखी। बक्शी की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
टेक्सास में स्थित यह मंदिर भारतीय और हिंदू समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण है। प्रतिमा का निर्माण और उसका उद्घाटन अमेरिका में हिंदू समुदाय की बढ़ती सांस्कृतिक मौजूदगी के संदर्भ में भी देखा गया है।
अमेरिका का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है और वहां अलग-अलग धर्मों के लोग अपने धार्मिक विश्वासों और परंपराओं का पालन करते हैं। ऐसे में किसी धार्मिक स्थल या प्रतीक को लेकर धमकी भरी भाषा इस्तेमाल किए जाने पर धार्मिक स्वतंत्रता और सह-अस्तित्व को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि इस मामले में सोशल मीडिया पोस्ट के पीछे व्यक्ति का वास्तविक उद्देश्य क्या था, यह स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में राजनीतिक माहौल भी सक्रिय है और विभिन्न मुद्दों को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है। धार्मिक पहचान, प्रवासी समुदाय और अमेरिकी संस्कृति जैसे विषय अक्सर राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बनते हैं। ऐसे में टेक्सास की इस घटना ने भी सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि भगवान हनुमान की प्रतिमा को लेकर की गई कथित धमकी का वास्तविक संदर्भ क्या था और क्या इसके खिलाफ कोई आधिकारिक कार्रवाई होती है। दूसरी ओर, रुचर बक्शी जैसे भारतीय मूल के लोगों की प्रतिक्रिया ने यह मुद्दा धार्मिक स्वतंत्रता और बहुलतावाद की बहस से जोड़ दिया है। मामले को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है और संबंधित व्यक्ति अपने बयान को लेकर कोई स्पष्टीकरण देता है या नहीं, इस पर नजर बनी हुई है।


