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इटली की संसद में मिनी स्कर्ट पहनकर महिला सांसदों का अनोखा विरोध, ताजानी के बयान पर मचा सियासी बवाल

इटली की संसद में 22 सितंबर को कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। महिला विपक्षी सांसद मिनी स्कर्ट पहनकर संसद पहुंचीं और उनके इस कदम के पीछे था एक ऐसा बयान, जिसमें महिलाओं के पहनावे को उनके चरित्र, वैवाहिक जीवन और भरोसेमंद होने से जोड़ दिया गया था। यह विरोध सिर्फ कपड़ों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि महिलाओं की पसंद और स्वतंत्रता को लेकर एक राजनीतिक संदेश के तौर पर सामने आया।

विवाद की शुरुआत इटली के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अंतोनियो ताजानी के एक बयान से हुई। रोम के पास फोर्मेल्लो में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम में ताजानी से शादी और अपने बेटे के लिए जीवनसाथी चुनने को लेकर सवाल किया गया था। जवाब में उन्होंने एक कम दिखावटी, ज्यादा गंभीर और भरोसेमंद महिला को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी महिला अच्छी मां बन सकती है और उदाहरण देते हुए उसके पहनावे में लंबी स्कर्ट का जिक्र किया।

ताजानी के बयान के बाद इटली में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। विपक्षी सांसदों ने सवाल उठाया कि आखिर किसी महिला की स्कर्ट की लंबाई को उसके चरित्र, वफादारी या पारिवारिक जिम्मेदारी से कैसे जोड़ा जा सकता है। इसी विवाद के बीच 22 सितंबर को विपक्ष की महिला सीनेटरों ने संसद के उच्च सदन में एक साथ स्कर्ट पहनकर विरोध दर्ज कराया।

इस प्रदर्शन की पहल इटालिया वीवा की सीनेटर राफाएला पायता ने की थी। महिला सांसदों ने अपने पहनावे के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि महिलाएं क्या पहनेंगी, इसका फैसला उनका अपना होना चाहिए। उनका कहना था कि कपड़ों की लंबाई किसी महिला के चरित्र या विश्वसनीयता का पैमाना नहीं हो सकती।

इस विरोध प्रदर्शन में अलग-अलग विपक्षी दलों से जुड़ी महिला सांसद शामिल हुईं। उन्होंने सामूहिक रूप से तस्वीरें भी खिंचवाईं और ताजानी के बयान को लेकर अपनी असहमति दर्ज कराई। खास बात यह रही कि जिन कपड़ों को लेकर बयान दिया गया था, उन्हीं कपड़ों को महिला सांसदों ने विरोध का माध्यम बना दिया।

इसी विवाद के दौरान इटली के राजनेता रॉबर्टो वान्नाची की टिप्पणी ने भी मामले को और चर्चा में ला दिया। जब उनसे पूछा गया कि उन्हें महिलाओं की लंबी स्कर्ट पसंद है या छोटी, तो उन्होंने एक ऐसी टिप्पणी की जिसे लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने उनके बयान को भी अपने विरोध के संदर्भ में उठाया।

बढ़ते विवाद के बीच अंतोनियो ताजानी ने अपने बयान को लेकर माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य महिलाओं का अपमान करना नहीं था और अगर उनकी बात से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका खेद है। हालांकि, उनके स्पष्टीकरण के बावजूद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस जारी रही।

पूरे घटनाक्रम ने महिलाओं के पहनावे और उनके सामाजिक मूल्यांकन को लेकर एक व्यापक बहस को जन्म दिया है। सवाल यह उठाया जा रहा है कि किसी महिला की पोशाक को उसके चरित्र, मातृत्व या वैवाहिक जीवन से जोड़ना कितना उचित है। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन इस बात का प्रतीक बन गया कि राजनीतिक विरोध के लिए कभी-कभी वही चीज भी इस्तेमाल की जा सकती है, जिसे लेकर विवाद शुरू हुआ हो।

इटली की संसद में हुआ यह विरोध इसलिए भी खास रहा क्योंकि यहां पारंपरिक नारों और पोस्टरों के बजाय कपड़ों को ही राजनीतिक संदेश का माध्यम बनाया गया। महिला सांसदों ने अपने तरीके से यह दिखाने की कोशिश की कि पहनावे को लेकर व्यक्तिगत पसंद को किसी महिला के चरित्र का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

अब यह पूरा मामला इटली की राजनीति से निकलकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है। एक तरफ मंत्री का बयान और उसके बाद आई माफी है, तो दूसरी तरफ महिला विपक्षी सांसदों का प्रतीकात्मक विरोध। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस सामने ला दी है कि महिलाओं की पहचान और उनके व्यक्तित्व का आकलन उनके कपड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए या नहीं।

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