दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर निगरानी और कार्रवाई के लिए एक नया 24×7 कमांड सेंटर शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शास्त्री पार्क स्थित डीएमआरसी आईटी पार्क में DPCC के Integrated Command and Control Centre यानी ICCC का उद्घाटन किया। यह सेंटर प्रदूषण के स्रोतों की रियल टाइम निगरानी करेगा और खासतौर पर सर्दियों के दौरान वॉर रूम की तरह काम करेगा।
इस नए सेंटर की खास बात है कि यहां AI, CCTV, एयर क्वालिटी डेटा और GPS जैसी तकनीकों को एक साथ जोड़ा गया है। 700 से ज्यादा निर्माण साइट्स पर AI आधारित CCTV कैमरों से निगरानी की जाएगी। अगर किसी साइट पर प्रदूषण से जुड़े नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित विभाग को अलर्ट किया जा सकेगा।
सिर्फ निर्माण स्थलों पर ही नजर नहीं रखी जाएगी। सड़क पर धूल और प्रदूषण को कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाली रोड स्वीपिंग मशीनों को GPS से जोड़ा जाएगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि सफाई वाली मशीनें कहां चल रही हैं और उनका संचालन सही तरीके से हो रहा है या नहीं।
इसके अलावा वायुदूत टीमों के बॉडी कैमरों को भी कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा। ये टीमें सड़क की धूल, खुले में कचरा जलाने और निर्माण गतिविधियों से जुड़े प्रदूषण जैसे मामलों की निगरानी करेंगी। सेंटर से मिलने वाले डेटा के आधार पर फील्ड टीमों को कार्रवाई के लिए भेजा जा सकेगा।
सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था के लिए 78 सब-डिविजन स्तर की टीमें काम करेंगी। इन टीमों के जरिए अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण से जुड़े मामलों की पहचान और कार्रवाई की जाएगी। GPS आधारित सिस्टम से फील्ड टीमों और वाहनों की गतिविधियों की भी निगरानी की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस सिस्टम के काम करने का मंत्र ‘Detect, Analyse, Act, Verify’ बताया है। यानी सबसे पहले प्रदूषण या नियमों के उल्लंघन का पता लगाया जाएगा, फिर उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण होगा, उसके बाद संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए अलर्ट किया जाएगा और अंत में यह देखा जाएगा कि कार्रवाई का असर हुआ या नहीं।
कमांड सेंटर में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों से मिलने वाले डेटा का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण की स्थिति और संभावित हॉटस्पॉट की पहचान करने में मदद मिलेगी। लोगों की शिकायतों और फील्ड निरीक्षण से मिलने वाली जानकारी को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है।
दिल्ली सरकार ने लोगों की भागीदारी के लिए ‘जन सुझाव’ पोर्टल का भी इस्तेमाल करने की बात कही है। इसके जरिए लोग प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं की जानकारी प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण का स्तर अक्सर चिंता का विषय बनता है। ऐसे में सरकार इस कमांड सेंटर को प्रदूषण के मौसम में वॉर रूम की तरह इस्तेमाल करेगी। हालांकि नई व्यवस्था का वास्तविक असर कितना होता है, यह आने वाले प्रदूषण सीजन में इसकी निगरानी और कार्रवाई के परिणामों से स्पष्ट होगा।
फिलहाल दिल्ली में प्रदूषण पर नजर रखने के लिए AI कैमरे, GPS, बॉडी कैमरे और रियल टाइम डेटा को एक ही कमांड सेंटर से जोड़ दिया गया है। अब 700 से ज्यादा निर्माण साइट्स, सड़क सफाई और फील्ड टीमों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और कार्रवाई को तेज करने की कोशिश की जाएगी।


