असम के मशहूर गायक जुबीन गर्ग की मौत के मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार सह-गायिका अमृतप्रभा महंत को जमानत दे दी है। अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर राहत प्रदान की है। इस फैसले के बाद मामले की जांच और गिरफ्तार अन्य आरोपियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जुबीन गर्ग की मौत ने असम सहित पूरे पूर्वोत्तर भारत में लोगों को झकझोर दिया था। अब इस मामले में अदालत से मिली राहत को न्यायिक प्रक्रिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है।
जानकारी के अनुसार, अमृतप्रभा महंत को असम पुलिस के विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने 2 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले उनसे कई घंटे तक पूछताछ की गई थी। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वह हाफलोंग जेल में बंद थीं। अब गुवाहाटी हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्हें राहत मिली है। इस मामले में मुख्य मुकदमे के तहत गिरफ्तार आरोपियों में जमानत पाने वाली वह पहली आरोपी बताई जा रही हैं। अदालत के फैसले के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसी और अभियोजन पक्ष आगे की कानूनी प्रक्रिया में क्या कदम उठाते हैं।
जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में समुद्र में तैरने के दौरान हुई थी। उस समय वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में शामिल होने के लिए सिंगापुर गए हुए थे। 52 वर्षीय गायक की मौत की खबर सामने आते ही उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई थी। असम में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए और लोगों ने घटना की परिस्थितियों की निष्पक्ष तथा विस्तृत जांच की मांग उठाई। जुबीन गर्ग असम के सबसे लोकप्रिय गायकों में शामिल थे। उनके संगीत और सांस्कृतिक योगदान के कारण राज्य में उनकी बड़ी संख्या में प्रशंसक हैं। यही वजह रही कि उनकी मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा।
जनता के आक्रोश और मामले की गंभीरता को देखते हुए असम सरकार ने जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया था। एसआईटी ने घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ की और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई। जांच के दौरान सिंगापुर में जुबीन गर्ग के साथ मौजूद रहे कई लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई। इसी सिलसिले में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी का उद्देश्य घटना से जुड़ी परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना था, ताकि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा सके।
इस मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए, उनमें नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के आयोजक श्यामकानु महंत, जुबीन गर्ग के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और बैंड के सदस्य शेखरज्योति गोस्वामी के साथ सह-गायिका अमृतप्रभा महंत भी शामिल हैं। जांच एजेंसी ने इन सभी की भूमिका की पड़ताल की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एसआईटी ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया है। हालांकि, प्रत्येक आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उनकी कानूनी स्थिति का निर्धारण अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा। किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने का अधिकार अदालत के पास है।
अमृतप्रभा महंत को जमानत मिलने के बाद अब इस मामले में आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी। अदालत द्वारा जमानत दिया जाना यह दर्शाता है कि संबंधित आरोपी को निर्धारित कानूनी शर्तों के तहत मुकदमे के दौरान राहत दी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि मामले में उनकी भूमिका को लेकर सभी सवाल समाप्त हो गए हैं या उन्हें आरोपों से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। मामले की अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल जुबीन गर्ग के प्रशंसकों और उनके परिवार के लिए यह मामला बेहद संवेदनशील बना हुआ है। लोगों की मांग है कि उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों का सच सामने आए और यदि किसी की जिम्मेदारी साबित होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। अब सबकी निगाहें अदालत में होने वाली अगली सुनवाई और मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की कानूनी स्थिति पर टिकी हैं।


