रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए मदद की पेशकश की है। तुर्कमेनिस्तान में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ हुई मुलाकात में पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस विवाद को सुलझाने के लिए हरसंभव प्रयास करने को तैयार है। इस बैठक के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर रूस की भूमिका और ईरान के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सबसे अहम बात यह है कि तनाव और हमलों के बीच भी ईरान ने शांतिपूर्ण बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रूस की मध्यस्थता से क्षेत्र में शांति की कोई नई राह निकल सकती है?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से मुलाकात के दौरान कहा कि मौजूदा समय में क्षेत्र की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा कि रूस क्षेत्रीय विवाद को समाप्त करने के लिए ईरान की ओर से किए जा रहे प्रयासों से अवगत है और इस दिशा में अपनी तरफ से हरसंभव मदद देने के लिए तैयार है। पुतिन के अनुसार, ईरान ने मौजूदा परिस्थितियों का शांतिपूर्ण समाधान खोजने के लिए नए प्रस्ताव भी रखे हैं। रूस का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव का असर क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ रहा है।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने केवल क्षेत्रीय संकट पर ही चर्चा नहीं की, बल्कि रूस और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहे। रूस और ईरान पिछले कुछ वर्षों में अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़े हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और पश्चिमी देशों के साथ तनाव के बीच दोनों देश आर्थिक तथा राजनीतिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी बातचीत के महत्व पर जोर दिया। ईरान का कहना है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से खोजा जाना चाहिए। तेहरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद शांतिपूर्ण समाधान की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, किसी भी समझौते तक पहुंचने के लिए संबंधित पक्षों के बीच भरोसा कायम करना और विवादित मुद्दों पर सहमति बनाना बेहद जरूरी होगा।
इस पूरे घटनाक्रम में रूस की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मॉस्को के ईरान के साथ मजबूत संबंध हैं और वह पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों में अपनी कूटनीतिक भूमिका बनाए रखना चाहता है। पुतिन की ओर से मदद की पेशकश इस बात का संकेत है कि रूस क्षेत्रीय तनाव को कम करने के प्रयासों में भागीदारी के लिए तैयार है। हालांकि, रूस की इस पहल का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका, इजराइल और ईरान जैसे प्रमुख पक्ष बातचीत के लिए किस हद तक तैयार होते हैं।
अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के विवाद का असर केवल इन देशों तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों, व्यापारिक मार्गों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है। यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो उसका प्रभाव कई देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर पड़ सकता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें उन सभी कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं, जो संघर्ष को बढ़ने से रोक सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुतिन की पहल ईरान और उसके विरोधियों के बीच बातचीत का नया रास्ता खोल पाएगी? क्या अमेरिका और इजराइल भी विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए आगे आएंगे? फिलहाल इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं। लेकिन तुर्कमेनिस्तान में हुई इस मुलाकात ने इतना जरूर संकेत दिया है कि क्षेत्रीय संकट के बीच कूटनीतिक प्रयासों की संभावनाएं अभी समाप्त नहीं हुई हैं। आने वाले दिनों में संबंधित देशों के रुख और बातचीत की दिशा से तय होगा कि पश्चिम एशिया तनाव से बाहर निकलने की ओर बढ़ता है या संघर्ष और गहराता है।


