अफ्रीकी देश जिबूती के तट के पास प्रवासियों से भरी एक नाव पलटने से बड़ा हादसा हो गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में कम से कम 109 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 15 बच्चे भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन यानी आईओएम ने रविवार को हादसे की जानकारी दी। नाव में कुल 305 लोग सवार थे। हादसे के बाद 80 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि कम से कम 116 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। समुद्र में लापता लोगों की तलाश और हादसे से जुड़ी जानकारी जुटाने के प्रयास जारी हैं।
आईओएम के अनुसार, यह नाव जिबूती से यमन की ओर जा रही थी। बृहस्पतिवार रात या शुक्रवार सुबह के दौरान नाव समुद्र में पलट गई। इस दुर्घटना में 52 पुरुषों, 42 महिलाओं और 15 बच्चों की जान चली गई। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नाव पर सैकड़ों लोग सवार थे और बड़ी संख्या में लोग समुद्र में लापता हो गए।
यह दुर्घटना एक बार फिर उन खतरों को सामने लाती है, जिनका सामना बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश में अपना देश छोड़ने वाले प्रवासियों को करना पड़ता है। अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र से हर साल हजारों लोग जिबूती के रास्ते यमन और फिर खाड़ी देशों की ओर जाने का प्रयास करते हैं। इसके लिए उन्हें बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पार करना पड़ता है, जहां समुद्री यात्रा जोखिम भरी साबित हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने कहा कि यमन में हिंसा और अस्थिरता बने रहने के बावजूद इस मार्ग से प्रवासियों का आवागमन जारी है। रोजगार और सुरक्षित भविष्य की तलाश में लोग अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्री रास्तों से यात्रा करते हैं। कई बार क्षमता से अधिक लोगों को नावों में बैठा दिया जाता है, जिससे दुर्घटना होने पर जान बचाना और भी मुश्किल हो जाता है।
जिबूती में आईओएम के मिशन प्रमुख अलेक्जेंड्रे कोइसाक ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह जानमाल का बेहद दुखद नुकसान है। उन्होंने कहा कि यह त्रासदी उन गंभीर खतरों की याद दिलाती है, जिनका सामना प्रवासियों को रोजगार की तलाश में इस मार्ग पर करना पड़ता है।
फिलहाल इस हादसे में लापता लोगों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। 109 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 116 से अधिक लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है। इस घटना ने एक बार फिर अनियमित और जोखिम भरे प्रवासन मार्गों पर लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


