लखनऊ के शिवा शर्मा हत्याकांड में फरार चल रही 50 हजार रुपये की इनामी श्रद्धा दुबे को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी नागपुर में की गई, जहां वह लगातार अपनी पहचान और ठिकाना छिपाकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रही थी। इस कार्रवाई के बाद मामले में एक नया मोड़ आ गया है। सवाल यह है कि आखिर श्रद्धा दुबे इतने दिनों तक पुलिस की पकड़ से कैसे बचती रही और उसे गिरफ्तार करने के लिए क्या रणनीति अपनाई गई?
उत्तर प्रदेश पुलिस के मुताबिक, श्रद्धा दुबे की तलाश लगातार की जा रही थी। उसकी लोकेशन का पता लगाने के लिए तकनीकी निगरानी का सहारा लिया जा रहा था। जांच के दौरान मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस की टीमें उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। आखिरकार लखनऊ पुलिस और उत्तर प्रदेश विशेष कार्यबल की संयुक्त टीम ने नागपुर में कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। इस अभियान में नागपुर पुलिस की भी मदद ली गई।
उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के अनुसार, श्रद्धा दुबे फरारी के दौरान अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रही थी। बताया गया कि वह बुर्का पहनकर यात्रा करती थी, ताकि रास्ते में उसे पहचानना मुश्किल हो। इसके अलावा, वह बार-बार टैक्सी बदलती थी और अपने ठिकाने भी लगातार बदल रही थी।
पुलिस के अनुसार, श्रद्धा दुबे के साथ उसकी बहन और चालक भी मौजूद थे। फरारी के दौरान तीनों यात्रा के तरीके और रुकने की जगह बदलते रहते थे। वे किसी एक स्थान पर ज्यादा समय तक नहीं ठहरते थे, जिससे पुलिस की टीम के पहुंचने से पहले ही वहां से निकलने की कोशिश की जा सके। हालांकि, फरारी के दौरान अपनाए गए इन तरीकों से आखिरकार वह पुलिस की गिरफ्त से बच नहीं सकी।
इस पूरे अभियान में तकनीकी निगरानी और विभिन्न पुलिस टीमों के बीच तालमेल की अहम भूमिका बताई गई है। लखनऊ पुलिस और उत्तर प्रदेश विशेष कार्यबल ने नागपुर पुलिस की सहायता से कार्रवाई को अंजाम दिया। गिरफ्तारी के बाद अब मामले की जांच में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
शिवा शर्मा हत्याकांड में श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी को पुलिस की कार्रवाई के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियां मामले से जुड़े तथ्यों और घटनाक्रम की आगे पड़ताल करेंगी। फिलहाल, इस मामले में सामने आने वाली आधिकारिक जानकारियों पर नजर बनी हुई है।


