लगातार कब्ज की समस्या आम है और कभी न कभी ज्यादातर लोगों को इसका सामना करना पड़ता है। लेकिन अगर कब्ज लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ मल में खून आने और बिना किसी स्पष्ट कारण वजन घटने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ऐसे लक्षण बवासीर समेत कई बीमारियों से जुड़े हो सकते हैं और कुछ मामलों में मलाशय के कैंसर यानी रेक्टल कैंसर की जांच की जरूरत भी हो सकती है।
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एम. डी. रे ने कब्ज और रेक्टल कैंसर से जुड़े लक्षणों को समझने की जरूरत पर जोर दिया है। डॉक्टरों के मुताबिक, हर बार कब्ज होने का मतलब कैंसर नहीं होता। हालांकि, अगर समस्या लगातार बनी रहे या उसके साथ अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
दरअसल, लंबे समय तक कब्ज रहने पर मल त्याग में जोर लगाना पड़ सकता है। इससे कुछ लोगों में बवासीर की समस्या हो सकती है। बवासीर में गुदा और मलाशय के निचले हिस्से की रक्त वाहिकाओं में सूजन आ सकती है। इसके कारण मल त्याग के दौरान खून आना, खुजली, असहजता या गुदा के आसपास गांठ महसूस होने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
लेकिन परेशानी तब बढ़ सकती है, जब मल में खून आने को केवल बवासीर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाए। रेक्टल कैंसर में भी मल के साथ खून आ सकता है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर यह तय करना सही नहीं है कि समस्या बवासीर की है या किसी दूसरी बीमारी की। दोनों स्थितियों में अंतर जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी हो सकती है।
डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि बवासीर कैंसर में नहीं बदलता, लेकिन बवासीर होने का अर्थ यह भी नहीं है कि किसी व्यक्ति को कैंसर नहीं हो सकता। इसीलिए मल में खून आने की समस्या को सिर्फ बवासीर समझकर घरेलू उपचार करते रहना उचित नहीं है। खासतौर पर अगर यह परेशानी बार-बार हो रही है, तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
रेक्टल कैंसर के संभावित लक्षणों में मल के साथ खून आना, मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव, लंबे समय तक दस्त या कब्ज रहना, मल का सामान्य से अलग आकार होना, मल त्याग के बाद भी पेट साफ न होने का एहसास और बिना किसी स्पष्ट कारण वजन कम होना शामिल हो सकते हैं। कुछ लोगों को पेट में दर्द, असहजता या कमजोरी भी महसूस हो सकती है।
हालांकि, इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर ही है। ऐसी परेशानियां कई दूसरी बीमारियों के कारण भी हो सकती हैं। लेकिन यदि लक्षण लगातार बने रहें, बढ़ रहे हों या उनके साथ मल में खून आने और वजन घटने जैसी समस्याएं हों, तो डॉक्टर से जल्द परामर्श लेना चाहिए।
यदि कब्ज की समस्या है, तो पर्याप्त पानी पीना, भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाना, फल-सब्जियां और साबुत अनाज खाना तथा नियमित शारीरिक गतिविधि करना मददगार हो सकता है। मल त्याग की इच्छा को बार-बार रोकने से भी बचना चाहिए। हालांकि, लंबे समय से बनी कब्ज को केवल खानपान की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर मल में खून आ रहा है, बिना वजह वजन घट रहा है या मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव हो रहा है, तो डॉक्टर से जांच करवाएं। जरूरत के अनुसार चिकित्सक शारीरिक परीक्षण और अन्य जांचों की सलाह दे सकते हैं।
ध्यान रखें, लगातार कब्ज होना अपने आप में रेक्टल कैंसर का प्रमाण नहीं है। लेकिन इसके साथ खून आने, वजन घटने या मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव जैसे लक्षण हों, तो समय पर जांच करवाना बेहद जरूरी है। सही समय पर बीमारी की पहचान होने से उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।

