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अप्रैल 2027 से शुरू होगा ASUSE सर्वे, पहली बार महिला उद्यमियों की चुनौतियों पर पूछे जाएंगे खास सवाल

भारत के असंगठित क्षेत्र में कारोबार करने वाले उद्यमियों की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने के लिए केंद्र सरकार सर्वेक्षण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय वित्त वर्ष 2027-28 के लिए असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण अप्रैल 2027 से मार्च 2028 के बीच कराएगा। इस बार सर्वेक्षण में महिला उद्यमियों की समस्याओं, कारोबार में निवेश और बिजली के विभिन्न स्रोतों से जुड़े नए सवाल शामिल किए जाएंगे। इन बदलावों का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति की अधिक व्यापक जानकारी जुटाना और नीतियां बनाने के लिए उपयोगी आंकड़े उपलब्ध कराना है।

मंत्रालय के अनुसार, असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण यानी एएसयूएसई 2027-28 नए प्रारूप में आयोजित किया जाएगा। इसकी सर्वेक्षण अवधि को वित्त वर्ष के अनुरूप किया जा रहा है। इससे असंगठित क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों को आर्थिक गतिविधियों और सरकारी नीतियों के विश्लेषण के लिए अधिक उपयोगी बनाने में मदद मिल सकती है। सर्वेक्षण के माध्यम से ऐसे प्रतिष्ठानों की विशेषताओं, कामकाज और आर्थिक गतिविधियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है, जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस बार के सर्वेक्षण में सबसे अहम बदलाव महिला उद्यमियों से संबंधित सवालों को शामिल करना है। पहली बार महिलाओं को कारोबार शुरू करने और उसका संचालन करने के दौरान लैंगिक आधार पर जिन विशिष्ट बाधाओं का सामना करना पड़ता है, उनसे जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि असंगठित क्षेत्र में महिला उद्यमियों को अपने प्रतिष्ठान चलाने, प्रबंधन करने और कारोबार आगे बढ़ाने में किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे आंकड़े महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देने से जुड़ी नीतियों के निर्माण में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

सर्वेक्षण में निवेश से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए भी नया सवाल जोड़ा जाएगा। इसके जरिये प्रतिष्ठानों के निवेश की प्रवृत्तियों को बेहतर ढंग से समझने का प्रयास किया जाएगा। किसी कारोबार में निवेश का स्तर उसके विस्तार, उत्पादन क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को समझने में महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में नए सवालों से यह जानने में मदद मिल सकती है कि असंगठित क्षेत्र के उद्यम किस तरह निवेश कर रहे हैं और उनकी आर्थिक गतिविधियों में किस प्रकार के बदलाव आ रहे हैं।

ऊर्जा के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी इस बार सर्वेक्षण का हिस्सा होगी। प्रतिष्ठानों में बिजली के उपयोग के विभिन्न स्रोतों के बारे में सवाल पूछे जाएंगे। इससे यह समझने में सहायता मिल सकती है कि असंगठित क्षेत्र के उद्यम बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए किन स्रोतों पर निर्भर हैं। ऊर्जा की उपलब्धता और उसका इस्तेमाल कारोबार की लागत तथा संचालन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इस संबंध में एकत्र किए गए आंकड़े नीतिगत योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

कपड़ा मंत्रालय के अनुरोध पर हथकरघा, पावरलूम और हस्तशिल्प से जुड़े प्रतिष्ठानों की पहचान करने के लिए भी दो सवाल शामिल किए जाएंगे। इन सवालों के माध्यम से सर्वेक्षण में इन गतिविधियों से जुड़े कारोबारों को अधिक स्पष्ट रूप से पहचाना जा सकेगा। हथकरघा, पावरलूम और हस्तशिल्प देश में रोजगार तथा पारंपरिक कौशल से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियां हैं। इनके बारे में बेहतर आंकड़े उपलब्ध होने से संबंधित क्षेत्रों की जरूरतों को समझने और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

भारत में असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और आजीविका उपलब्ध कराता है। इसके अलावा, यह सकल मूल्य वर्धन में योगदान देता है और संगठित क्षेत्र से अपने जुड़ाव के माध्यम से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को समर्थन प्रदान करता है। ऐसे में इस क्षेत्र से जुड़े विश्वसनीय आंकड़े आर्थिक स्थिति का आकलन करने और भविष्य की योजनाएं तैयार करने के लिए जरूरी हैं।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय वर्ष 2021-22 से असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण कर रहा है। इसका उद्देश्य असंगठित प्रतिष्ठानों की विशेषताओं और उनकी आर्थिक गतिविधियों के बारे में व्यापक सांख्यिकीय जानकारी एकत्र करना है। इन आंकड़ों का इस्तेमाल आर्थिक विश्लेषण, नीतियां बनाने और राष्ट्रीय लेखांकन में किया जाता है।

मंत्रालय ने बताया कि मौजूदा एएसयूएसई 2026 के दौरान विभिन्न मंचों के माध्यम से संबंधित पक्षों से सुझाव और आंकड़ों से जुड़ी जरूरतें प्राप्त हुई हैं। इन्हीं सुझावों और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंतरिक आकलन के आधार पर 2027-28 के सर्वेक्षण की प्रश्नावली में बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। मंत्रालय ने प्रस्तावित प्रश्नावली पर टिप्पणियां और सुझाव निर्धारित प्रारूप में 15 नवंबर 2026 तक भेजने को कहा है। अब इन बदलावों के जरिए यह देखने पर जोर रहेगा कि असंगठित क्षेत्र की बदलती जरूरतों को समझने के लिए किस तरह के आंकड़े जुटाए जा सकते हैं।

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