दिल्ली में करोड़ों रुपये की साइबर धोखाधड़ी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ इकाई ने करीब 3.93 करोड़ रुपये की कथित साइबर धोखाधड़ी के मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में म्यूल बैंक खातों, विदेशी मनी एक्सचेंज ऐप और हवाला नेटवर्क से कथित संबंध सामने आए हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने और धोखाधड़ी की रकम के लेनदेन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में शिकायतकर्ता प्रिंस बंसल के आईसीआईसीआई बैंक खाते से पांच अक्टूबर को बिना अनुमति के कई संदिग्ध लेनदेन किए गए थे। जांच में सामने आया कि खाते से कुल 149 संदिग्ध लेनदेन के जरिए लगभग 3 करोड़ 93 लाख 59 हजार रुपये निकाल लिए गए। इतनी बड़ी रकम के अचानक खाते से निकलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई। पुलिस ने लेनदेन की कड़ियों को जोड़ते हुए उन खातों और लोगों की जानकारी जुटाई, जिनके माध्यम से रकम आगे भेजी गई थी।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को एक ही खाते में रखने के बजाय कई स्तरों पर अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। इन खातों को कथित तौर पर म्यूल बैंक खातों के रूप में इस्तेमाल किया गया था। ऐसे खातों का उपयोग साइबर अपराध में अवैध रूप से प्राप्त धन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए किया जा सकता है।
पुलिस का आरोप है कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों ने बैंक खातों से नकदी निकाली और फिर उसे दूसरे सदस्यों तक पहुंचाया। इस तरीके से रकम को कई चरणों में आगे बढ़ाया गया, जिससे उसके अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन खातों को किसने उपलब्ध कराया, नकदी निकालने की जिम्मेदारी किन लोगों के पास थी और पूरी रकम किन व्यक्तियों तक पहुंची।
इस मामले में विदेशी मनी एक्सचेंज ऐप यू होम और हवाला नेटवर्क से कथित जुड़ाव की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को देश के भीतर अलग-अलग स्थानों पर भेजने के साथ-साथ विदेशों में स्थानांतरित करने की भी कोशिश की गई थी। हालांकि, इन संबंधों की वास्तविक भूमिका और लेनदेन के पूरे तरीके की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस की कार्रवाई के दौरान सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अब उनसे पूछताछ और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच के जरिए नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि बैंक खातों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को इस धोखाधड़ी की जानकारी थी या उनके खातों का किसी अन्य तरीके से दुरुपयोग किया गया था।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लगभग 1 करोड़ 78 लाख रुपये की रकम पर लियन या होल्ड दर्ज किया गया है। इसका अर्थ है कि संबंधित धनराशि पर बैंकिंग प्रक्रिया के तहत रोक लगाई गई है, ताकि जांच के दौरान उसके इस्तेमाल या निकासी को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, इस रकम की अंतिम बरामदगी और पीड़ित को वापस मिलने की स्थिति अलग प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
साइबर अपराध के ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर कई बैंक खातों, नकदी निकासी और अन्य वित्तीय माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं। इससे जांच एजेंसियों के लिए रकम के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी का पता लगाना कठिन हो जाता है। इसी वजह से पुलिस बैंकिंग रिकॉर्ड, संदिग्ध लेनदेन और आरोपियों के आपसी संपर्कों की जांच कर रही है।
फिलहाल दिल्ली पुलिस इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका की पड़ताल करने के साथ-साथ कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के पूरे प्रवाह का पता लगाने में जुटी है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस साइबर धोखाधड़ी में कितने लोग शामिल थे और रकम को किन-किन माध्यमों से आगे पहुंचाया गया।


