केंद्र सरकार ने देश में खेल सामग्री के उत्पादन को बढ़ावा देने और भारत की वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेल सामग्री विनिर्माण योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना पर वर्ष 2026 से 2033-34 तक कुल 1,856.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य देश में खेल सामग्री के निर्माण को बढ़ावा देना, घरेलू उद्योगों को मजबूत करना और भारत को वैश्विक खेल सामग्री बाजार में एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि यह योजना देश के खेल सामग्री उद्योग के लिए बदलावकारी साबित हो सकती है। इससे विनिर्माण क्षेत्र में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे और छोटे कारोबारियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। योजना के तहत खेल सामग्री के उत्पादन के लिए विशेष विनिर्माण क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों यानी एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सरकार की इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य खेल सामग्री के उत्पादन में घरेलू कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना है। भारत में क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन और अन्य खेलों से जुड़ी सामग्री की मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में देश के भीतर उत्पादन क्षमता विकसित होने से उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं। विशेष विनिर्माण क्षेत्रों के विकास से संबंधित इकाइयों को उत्पादन, संसाधन और कारोबार विस्तार के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
योजना में अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को भी अहम स्थान दिया गया है। खेल सामग्री की गुणवत्ता बेहतर बनाने, नई तकनीकों को अपनाने और आधुनिक उत्पादन प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करने पर जोर रहेगा। इससे भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, खेल सामग्री के निर्माण में काम करने वाले कारीगरों, तकनीकी कर्मचारियों और प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
इस योजना से एमएसएमई क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। छोटी और मध्यम विनिर्माण इकाइयां देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। खेल सामग्री के उत्पादन से जुड़ी ऐसी इकाइयों को प्रोत्साहन मिलने पर स्थानीय स्तर पर कारोबार का विस्तार हो सकता है। इसके साथ ही कच्चे माल की आपूर्ति, पैकेजिंग, परिवहन और अन्य संबंधित सेवाओं में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह पहल गुणवत्ता, रोजगार और निर्यात के अवसरों को बढ़ावा देगी। उनके मुताबिक, योजना से मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का लक्ष्य केवल घरेलू जरूरतों के लिए खेल सामग्री तैयार करना ही नहीं, बल्कि भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूत पहचान दिलाना है।
कुल मिलाकर, 1,856.67 करोड़ रुपये की यह योजना देश में खेल सामग्री निर्माण को नई दिशा देने की कोशिश है। हालांकि, इसके वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि विनिर्माण क्षेत्रों का विकास किस तरह होता है, उद्योगों को किस स्तर पर सहायता मिलती है और भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर कितना खरा उतरते हैं। यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलने के साथ रोजगार, निवेश और निर्यात के अवसर बढ़ सकते हैं।


